Income Tax Return: वो कागज जो आपकी ईमानदारी का सबूत बन जाता है
राजेश को अपनी पहली नौकरी मिले दो साल हो चुके थे। सैलरी अच्छी थी, लाइफ सेट थी। एक दिन ऑफिस में अचानक सबके बीच चर्चा छिड़ गई - "अरे यार, ITR फाइल करना तो बाकी है!" राजेश ने पूछा, "ये ITR क्या होता है?" सब हंस पड़े। उसे लगा शायद कोई छोटी-मोटी फॉर्मैलिटी होगी। लेकिन जब उसे पता चला कि इनकम टैक्स रिटर्न न भरने पर पेनल्टी लग सकती है, लोन नहीं मिलता, विजा में दिक्कत आती है, तब उसे एहसास हुआ कि ये कोई मामूली चीज नहीं है।
असल में, Income Tax Return भरना सिर्फ एक कानूनी जिम्मेदारी नहीं है - ये आपकी वित्तीय पहचान का दस्तावेज है। ये बताता है कि आप कितना कमाते हैं, कितना टैक्स देते हैं, और सबसे जरूरी - आप एक जिम्मेदार नागरिक हैं।
ITR क्या है और क्यों जरूरी है?
Income Tax Return यानी आयकर विवरणी एक ऐसा फॉर्म है जिसमें आप सरकार को अपनी पूरी साल की कमाई, खर्च, निवेश और टैक्स की जानकारी देते हैं। मान लीजिए आपने साल भर में 8 लाख रुपये कमाए, उसमें से 1 लाख टैक्स कटा, 50 हजार आपने बचत में लगाए - ये सब डिटेल ITR में भरते हैं।
भारत में जिस किसी की आय बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से ज्यादा है, उसे रिटर्न फाइल करना अनिवार्य है। नई टैक्स व्यवस्था में ये लिमिट 3 लाख रुपये सालाना है। लेकिन सिर्फ कानूनी बाध्यता ही नहीं, इसके कई व्यावहारिक फायदे भी हैं।
ITR भरने के मुख्य फायदे:
a) जब आप होम लोन या कार लोन के लिए अप्लाई करते हैं, बैंक सबसे पहले आपका ITR मांगता है - ये आपकी इनकम का प्रूफ है
b) विदेश में विजा अप्लाई करते समय भी पिछले 3-5 साल का ITR जरूरी होता है
c) अगर आपसे गलती से ज्यादा टैक्स कट गया है तो रिटर्न भरकर ही आप रिफंड ले सकते हैं
d) ये आपकी Financial Credibility का सबूत बनता है
ITR के प्रकार: कौन सा फॉर्म किसके लिए?
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अलग-अलग तरह की इनकम के लिए अलग-अलग फॉर्म बनाए हैं।
1. ITR-1 (सहज)
सबसे सिंपल फॉर्म है। अगर आप नौकरीपेशा हैं, आपकी सैलरी 50 लाख से कम है, एक घर है, और बैंक में ब्याज मिलता है - तो ये फॉर्म आपके लिए है। ज्यादातर छोटे टैक्सपेयर्स इसी फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।
2. ITR-2
उनके लिए है जिनकी इनकम बिजनेस या प्रोफेशन से नहीं है, लेकिन वो थोड़े कॉम्प्लेक्स कैटेगरी में आते हैं। मान लीजिए आपके पास एक से ज्यादा घर हैं, या आपने शेयर बेचकर कैपिटल गेन कमाया है, तो ITR-2 भरना होगा।
3. ITR-3
बिजनेसमैन और प्रोफेशनल्स के लिए है। अगर आप डॉक्टर हैं, वकील हैं, या कोई दुकान चलाते हैं तो ये फॉर्म आपका है। इसमें बिजनेस की पूरी बैलेंस शीट और प्रॉफिट-लॉस अकाउंट अटैच करनी होती है।
4. ITR-4 (सुगम)
छोटे बिजनेसमैन के लिए आसान ऑप्शन है। अगर आपका टर्नओवर 2 करोड़ से कम है और आप प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम (44AD, 44ADA, 44AE) के तहत आते हैं, तो ये फॉर्म काफी सुविधाजनक है।
नोट: ITR-5, 6, 7 पार्टनरशिप फर्म्स, कंपनियों और ट्रस्ट्स के लिए हैं। आम आदमी को इनसे सरोकार नहीं।
ITR भरने से पहले ये दस्तावेज रखें तैयार
राजेश ने जब पहली बार रिटर्न भरने की सोची तो सबसे बड़ी परेशानी थी - कौन-कौन से पेपर चाहिए? असल में अगर सही डॉक्युमेंट्स पहले से तैयार हों, तो ITR भरना बिल्कुल आसान है।
जरूरी दस्तावेजों की सूची:
A. Form 16
- ये आपकी कंपनी देती है
- इसमें पूरे साल की सैलरी और काटे गए TDS की डिटेल होती है
- एक से ज्यादा जगह नौकरी की है तो सभी कंपनियों से लें
B. Form 16A/16B/16C
- बैंक FD, रेंट या दूसरे सोर्स से इनकम में कटे TDS के लिए
- जिसने टैक्स काटा है उससे मिलता है
C. बैंक स्टेटमेंट
- सेविंग अकाउंट का ब्याज देखने के लिए
- सभी बैंक अकाउंट्स का स्टेटमेंट रखें
D. इन्वेस्टमेंट प्रूफ
- PPF की रसीद
- LIC की पॉलिसी
- ट्यूशन फीस की रसीद
- होम लोन का सर्टिफिकेट
- हेल्थ इंश्योरेंस की पॉलिसी
E. कैपिटल गेन स्टेटमेंट
- शेयर या म्यूचुअल फंड बेचे हैं तो जरूरी
- डीमैट अकाउंट से डाउनलोड हो जाता है
F. बेसिक डॉक्युमेंट्स
- PAN Card
- Aadhaar Card
- बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड (रिफंड के लिए)
ऑनलाइन ITR भरने का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस
आजकल ऑनलाइन ITR फाइल करना बेहद आसान हो गया है। सरकार ने ई-फाइलिंग पोर्टल को इतना यूजर-फ्रेंडली बना दिया है कि थोड़ी समझ हो तो कोई भी खुद भर सकता है।
स्टेप 1: रजिस्ट्रेशन और लॉगिन
- www.incometax.gov.in पर जाएं
- पहली बार है तो रजिस्टर करें (PAN और आधार से)
- रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन करें
स्टेप 2: e-File सेक्शन में जाएं
- "e-File" का ऑप्शन चुनें
- "Income Tax Return" सलेक्ट करें
स्टेप 3: Assessment Year और फॉर्म चुनें
- सही Assessment Year सलेक्ट करें (जैसे 2024-25 की इनकम के लिए 2025-26)
- अपनी इनकम के हिसाब से ITR फॉर्म चुनें
- Filing Type में "Original" सलेक्ट करें (पहली बार भर रहे हैं तो)
स्टेप 4: डेटा भरना
- "Pre-fill" ऑप्शन से Form 26AS और AIS का डेटा ऑटोमैटिक आ जाता है
- लेकिन एक बार मैन्युअली चेक जरूर करें
- सारी इनकम सोर्स add करें (सैलरी, ब्याज, रेंट, कैपिटल गेन आदि)
स्टेप 5: Deductions क्लेम करें
महत्वपूर्ण Deductions:
a) Section 80C - 1.5 लाख तक की छूट
- PPF, EPF, LIC
- ELSS म्यूचुअल फंड
- होम लोन का प्रिंसिपल
- बच्चों की ट्यूशन फीस
b) Section 80D - हेल्थ इंश्योरेंस
- खुद और परिवार के लिए 25,000 रुपये
- 60 साल से ऊपर के पेरेंट्स के लिए 50,000 रुपये
c) Section 80G - डोनेशन की छूट
d) Section 80CCD(1B) - NPS में अतिरिक्त 50,000 की छूट
स्टेप 6: Tax Calculate करें
- सब कुछ भरने के बाद "Calculate Tax" पर क्लिक करें
- सिस्टम बताएगा कि कितना टैक्स देना है या रिफंड मिलेगा
- सब सही लगे तो "Validate" करें
स्टेप 7: Verification
सबसे जरूरी स्टेप - बिना इसके रिटर्न अधूरा रहेगा
Verification के तरीके:
- Aadhaar OTP: सबसे आसान और तेज (तुरंत वेरिफाई हो जाता है)
- Net Banking: EVC जेनरेट करके
- Demat Account: EVC के जरिए
- ITR-V पोस्ट: अगर डिजिटल ऑप्शन काम न करें (120 दिन के अंदर)
स्टेप 8: Acknowledgement
- वेरिफाई करते ही Acknowledgement नंबर मिलेगा
- ये संभाल कर रखें
- कुछ दिनों में ईमेल पर ITR-V की कॉपी आएगी
Offline ITR कैसे भरें?
हर किसी को ऑनलाइन प्रोसेस सुविधाजनक नहीं लगता। खासकर अगर इंटरनेट स्पीड स्लो है या कोई टेक्निकल प्रॉब्लम आ रही है, तो Offline Utility भी अच्छा ऑप्शन है।
Offline Filing का प्रोसेस:
-
Income Tax की वेबसाइट से अपने ITR फॉर्म की Offline Utility डाउनलोड करें
-
ये Java-based software है - इसे कंप्यूटर में इंस्टॉल करें
-
बिना इंटरनेट के पूरा फॉर्म भरें (हर सेक्शन में डेटा एंट्री करें)
-
बीच में सेव करके बाद में जारी रख सकते हैं
-
सब कुछ भरने के बाद "Validate" बटन दबाएं
-
एक XML file generate होगी
-
इस XML file को Income Tax की वेबसाइट पर अपलोड करें
-
फिर वेरिफिकेशन करें (Aadhaar OTP या दूसरे तरीके से)
Offline Method कब उपयोगी है:
- इंटरनेट कनेक्शन slow हो
- बहुत complex data हो
- आराम से समय लेकर भरना चाहते हों
ITR भरते समय इन गलतियों से बचें
राजेश ने पहली बार जब रिटर्न भरा तो एक गलती हो गई - उसने बैंक FD का ब्याज नहीं दिखाया। उसे लगा कि बस सैलरी की इनकम बतानी है। बाद में डिपार्टमेंट से नोटिस आया तो पता चला कि हर तरह की इनकम रिपोर्ट करनी जरूरी है।
आम गलतियां जो नहीं करनी चाहिए:
1. सारी इनकम न दिखाना
लोग सोचते हैं कि सिर्फ मेन सैलरी या बिजनेस इनकम बताना काफी है। लेकिन ये भी दिखाना जरूरी है:
- बैंक में पड़े पैसों का ब्याज
- फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज
- किराये की इनकम
- फ्रीलांसिंग से आमदनी
- शेयर या म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन
याद रखें: Income Tax Department के पास AIS होता है जिसमें आपकी सारी फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की जानकारी होती है।
2. गलत ITR फॉर्म चुनना
कई लोग सोचते हैं कि ITR-1 सबसे आसान है तो बस वही भर देते हैं। लेकिन गलत फॉर्म भरने पर रिटर्न इनवैलिड हो जाता है।
3. Form 26AS और AIS से मैच न करना
ये दोनों डॉक्युमेंट आपके TDS और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन का सरकारी रिकॉर्ड हैं। हमेशा इन्हें चेक करके उसी के अनुसार रिटर्न भरें।
4. Deductions में झूठे क्लेम
- फेक LIC की रसीद दिखाना
- PPF में निवेश न करके भी क्लेम करना
- ये Tax Evasion माना जाता है और भारी पेनल्टी लगती है
5. बैंक डिटेल में गलती
- पुराना अकाउंट नंबर डालना
- IFSC कोड गलत लिखना
- रिफंड मिलना है तो सही डिटेल बहुत जरूरी है
6. Verification न करना
सबसे घातक गलती - बिना वेरिफिकेशन के रिटर्न प्रोसेस ही नहीं होगा और आप डिफॉल्टर की लिस्ट में आ जाएंगे।
Due Date और Penalty का गणित
Income Tax Return भरने की आखिरी तारीख बहुत महत्वपूर्ण है।
Due Dates:
- सैलरीड और नॉन-ऑडिट केस: 31 जुलाई
- ऑडिट केस: 31 अक्टूबर (बिजनेस का टर्नओवर 1 करोड़ से ज्यादा या प्रोफेशनल इनकम 50 लाख से ज्यादा)
Due Date Miss करने पर क्या होगा?
A. Late Filing Fee (Section 234F)
- 5 लाख से ज्यादा इनकम: 5,000 रुपये पेनल्टी
- 5 लाख से कम इनकम: 1,000 रुपये पेनल्टी
B. Interest (Section 234A)
- टैक्स बकाया है तो हर महीने 1% की दर से ब्याज
- उदाहरण: 50,000 रुपये टैक्स + 3 महीने देरी = 1,500 रुपये ब्याज
C. Tax Evasion का खतरा
- बिल्कुल ही रिटर्न नहीं भरा तो गंभीर मामला
- Department का नोटिस
Revised Return कब भर सकते हैं?
- Assessment Year के अंत तक
- उदाहरण: AY 2025-26 के लिए 31 मार्च 2026 तक
Updated Return (Section 139(8A))
- Assessment Year खत्म होने के 2 साल के भीतर
- अतिरिक्त फीस लगती है: 25% (पहले साल) या 50% (दूसरे साल)
Tax Regime का चुनाव: Old vs New
2020 के बाद से भारत में दो तरह की टैक्स व्यवस्थाएं हैं। दोनों की अपनी खूबियां हैं।
Old Tax Regime
Tax Slabs:
- 2.5 लाख तक: nil
- 2.5-5 लाख: 5%
- 5-10 लाख: 20%
- 10 लाख से ऊपर: 30%
फायदे:
- सभी Deductions और Exemptions मिलते हैं
- Section 80C, 80D, HRA, LTA सब क्लेम होते हैं
किसके लिए बेहतर:
- जो हर साल अच्छा निवेश करते हैं
- होम लोन है
- बच्चों की ट्यूशन फीस देते हैं
New Tax Regime
Tax Slabs:
- 3 लाख तक: nil
- 3-7 लाख: 5%
- 7-10 लाख: 10%
- 10-12 लाख: 15%
- 12-15 लाख: 20%
- 15 लाख से ऊपर: 30%
विशेषताएं:
- ज्यादातर Deductions नहीं मिलते
- बस Standard Deduction (75,000) मिलता है
किसके लिए बेहतर:
- जिनकी इनकम ज्यादा है
- कम निवेश करते हैं
चुनाव कैसे करें?
- अगर Deductions 2.5 लाख से ज्यादा हैं → Old Regime
- अगर कम निवेश करते हैं → New Regime
- हर साल चुनाव बदल सकते हैं (बिजनेस इनकम नहीं है तो)
Refund कब और कैसे मिलता है?
मान लीजिए आपकी सैलरी से पूरे साल में 1 लाख रुपये TDS कटा, लेकिन सारे Deductions जोड़ने के बाद असल टैक्स 70,000 ही बना। मतलब 30,000 रुपये का Refund आपको मिलना चाहिए।
Refund Process:
- ITR भरते समय सिस्टम Calculate करता है
- रिफंड बनता है तो रिटर्न में दिख जाता है
- रिटर्न Process होने के बाद Department पैसा भेजता है
- सीधे आपके बैंक अकाउंट में आता है
Timeline:
- आम तौर पर 3-4 महीने
- कभी-कभी 6 महीने तक
- Scrutiny में केस जाए तो और देर
Refund Status कैसे चेक करें?
- Income Tax की वेबसाइट पर "Refund Status" ऑप्शन
- PAN नंबर और Assessment Year डालें
जरूरी बातें:
- बैंक अकाउंट PAN से लिंक होना चाहिए
- अकाउंट एक्टिव होना चाहिए
- रिफंड में देरी हो तो Interest भी मिलता है (करीब 6% सालाना)
CA की मदद कब लें?
छोटी और सीधी-साधी इनकम वाले लोग खुद ही रिटर्न भर सकते हैं। लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जब CA की मदद लेना समझदारी है।
CA की जरूरत कब पड़ती है:
a) Tax Audit अनिवार्य है
- बिजनेस का टर्नओवर 1 करोड़ से ज्यादा
- प्रोफेशनल इनकम 50 लाख से ज्यादा
b) Capital Gain Tax की जटिलताएं
- Property बेची है
- Indexation, Section 54, Reinvestment rules
c) Multiple Sources of Income
- सैलरी, रेंट, बिजनेस, स्टॉक ट्रेडिंग - सब एक साथ
d) NRI Status
- भारत में भी इनकम है
- DTAA, Foreign Income की Reporting
CA की फीस:
- छोटे रिटर्न: 500-2000 रुपये
- कॉम्प्लेक्स केस: 5000-10000 या उससे ज्यादा
सुझाव: पहले खुद समझने की कोशिश करें, बहुत ज्यादा confusion हो तभी CA के पास जाएं।
E-Verification के तरीके
Income Tax Return भरने के बाद सबसे जरूरी स्टेप है Verification। बिना इसके आपका रिटर्न कानूनी तौर पर मान्य नहीं होगा।
E-Verification के विकल्प:
1. Aadhaar OTP (सबसे तेज)
- PAN, Aadhaar से लिंक होना चाहिए
- आधार में रजिस्टर्ड नंबर एक्टिव होना चाहिए
- Verify पर क्लिक → OTP आएगा → डालें → Done
2. Net Banking
- बैंक अकाउंट e-Verification के लिए एनेबल हो
- Net Banking से लॉगिन करें
- EVC (Electronic Verification Code) जेनरेट करें
- Income Tax पोर्टल पर डालें
3. Demat Account
- NSDL या CDSL की वेबसाइट पर लॉगिन करें
- EVC Generate का ऑप्शन
4. Pre-validated Bank Account
- पहले से पोर्टल पर अकाउंट वैलिडेट हो
- उसी से EVC मिल सकता है
5. ITR-V पोस्ट करना (आखिरी विकल्प)
- ITR-V का प्रिंट निकालें
- नीले या काले पेन से साइन करें (हाथ से)
- Bangalore के CPC के पते पर स्पीड पोस्ट करें
- 120 दिन के अंदर पहुंचना जरूरी
ITR से जुड़े Legal पहलू
Income Tax Return सिर्फ एक फॉर्मैलिटी नहीं, बल्कि एक कानूनी दायित्व है।
कानूनी प्रावधान:
Section 276CC - Willful Default
- जानबूझकर रिटर्न नहीं भरना अपराध है
- सजा: 3 महीने से 2 साल तक की जेल + Fine
- तभी लागू होता है जब टैक्स की रकम बहुत बड़ी हो
Section 270A - Penalty
- Underreporting और Misreporting के लिए
- पेनल्टी: 50% से 200% तक
Department से नोटिस आए तो:
- नोटिस को ध्यान से पढ़ें
- समय सीमा के भीतर Reply दें
- सारे Documents अटैच करें
- जटिल मामले में Tax Consultant या Lawyer की मदद लें
Appeal की प्रक्रिया:
- Demand Order से असहमत हैं तो 30 दिन के अंदर Appeal
- CIT(A) → ITAT → High Court → Supreme Court
याद रखें: Honest Mistakes के लिए सरकार सख्त नहीं होती। Revised या Updated Return भरकर सही कर सकते हैं।
Digital Tools और Resources
आजकल Income Tax Return भरना काफी आसान हो गया है क्योंकि कई Digital Tools उपलब्ध हैं।
सरकारी Tools:
a) Income Tax e-Filing Portal
- www.incometax.gov.in
- Step-by-Step Guide, Video Tutorials, FAQs
- AIS और Form 26AS यहीं देख सकते हैं
b) UMANG App
- सरकार का ऑफिशियल मोबाइल ऐप
- मोबाइल से ही ITR भर सकते हैं
- रिफंड स्टेटस चेक कर सकते हैं
Private Platforms:
- ClearTax
- TaxBuddy
- QuickBooks (ये paid services हैं लेकिन User-Friendly हैं)
अन्य उपयोगी Tools:
c) Tax Calculator
- Old और New Regime में टैक्स compare करें
- कई वेबसाइट पर उपलब्ध
d) Income Tax Helpline
- नंबर: 1800 180 1961
- queries पूछ सकते हैं
- पीक सीजन में line busy रहती है
अंतिम बातें
Income Tax Return भरना शुरू में डरावना लग सकता है, लेकिन एक बार समझ आ जाए तो बेहद आसान है। राजेश ने पहले साल CA से भरवाया, दूसरे साल उसे देखते हुए खुद किया, तीसरे साल से वो आराम से हर साल खुद ही भर लेता है। आपको भी बस एक बार ध्यान से करना है, फिर वो Routine बन जाता है।
Golden Rules - हमेशा याद रखें:
• सारी Income Report करें, चाहे छोटी ही क्यों न हो • Form 26AS और AIS से Match करके भरें • सही ITR Form चुनें • Deductions सही-सही क्लेम करें, फर्जी नहीं • Deadline से पहले भर दें • Verify जरूर करें - सबसे जरूरी स्टेप
ITR सिर्फ एक कानूनी जिम्मेदारी नहीं है - ये आपकी Financial Discipline का सबूत है। जब आप हर साल समय पर अपना रिटर्न भरते हैं, तो आप अपने पैसों पर बेहतर नियंत्रण रखते हैं। आपको पता होता है कि कहां-कहां से इनकम आ रही है, कहां टैक्स बच सकता है, कौन से निवेश फायदेमंद हैं।
सबसे बड़ी बात - ITR आपकी Financial Identity है। जब कभी बड़ा Financial Decision लेना हो (घर खरीदना, बिजनेस शुरू करना, विदेश जाना) तब ITR आपका सबसे मजबूत दस्तावेज बनता है। तो इसे हल्के में न लें, समय पर भरें और सही भरें।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या 2.5 लाख से कम इनकम पर भी ITR भरना जरूरी है?
अगर आपकी कुल इनकम बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से कम है तो कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। लेकिन भविष्य में लोन, विजा या Income Proof की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए भरना फायदेमंद है।
Q2. Revised Return कब तक भर सकते हैं?
अगर आपने गलत या अधूरा रिटर्न भर दिया है तो Assessment Year के अंत तक Revised Return भर सकते हैं। उदाहरण के लिए AY 2025-26 के लिए 31 मार्च 2026 तक।
Q3. ITR में PAN और Aadhaar Link होना जरूरी है क्या?
हां, बिल्कुल जरूरी है। PAN-Aadhaar Link नहीं होने पर रिटर्न प्रोसेस नहीं होगा और PAN भी निष्क्रिय हो सकता है। incometax.gov.in पर जाकर तुरंत लिंक करें।
Q4. Form 26AS क्या है और कैसे देखें?
Form 26AS आपकी TDS की पूरी Details दिखाता है। Income Tax Portal पर login करके 'View Form 26AS/Annual Tax Statement' में जाकर देख सकते हैं। इसे ITR से match करना जरूरी है।
Q5. अगर ITR Verify नहीं किया तो क्या होगा?
बिना Verification के आपका रिटर्न Invalid माना जाता है। ऐसे में Refund नहीं मिलेगा और Non-filing की पेनल्टी भी लग सकती है। Return submit करने के 120 दिन के अंदर verify करना अनिवार्य है।
⚠ अस्वीकरण (Disclaimer):
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य के लिए प्रकाशित किया गया है। आयकर कानून, टैक्स स्लैब, फाइलिंग प्रक्रिया, पेनल्टी और अन्य नियम समय-समय पर आयकर विभाग एवं भारत सरकार द्वारा बदले जा सकते हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि कोई भी वित्तीय या कानूनी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर नवीनतम जानकारी अवश्य जांचें या किसी योग्य कर सलाहकार/चार्टर्ड अकाउंटेंट से परामर्श लें। इस लेख में दी गई जानकारी पर निर्भर रहने से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे।