ELSS क्या है? टैक्स बचत + 12-15% रिटर्न | FD vs ELSS तुलना और Best Strategy।

 ELSS क्या है? टैक्स बचत + 12-15% रिटर्न | FD vs ELSS तुलना और Best Strategy।

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जब विक्रम को पता चला कि उसने 46,800 रुपये बर्बाद कर दिए

    मार्च का आखिरी हफ्ता था। विक्रम अपने CA के केबिन में बैठा था, माथे पर पसीना। CA ने कैलकुलेटर पर कुछ गिना और बोला, "सर, इस साल आपको 1,56,000 रुपये टैक्स देना होगा।"

विक्रम बोला, "लेकिन मैंने तो टैक्स सेविंग FD करवा रखी है।"

CA मुस्कुराया, "हां सर, वो डेढ़ लाख की FD से आपको 46,800 रुपये की टैक्स बचत हुई। लेकिन अगर वही पैसा ELSS में लगाया होता तो..."

"तो क्या होता?" विक्रम ने उत्सुकता से पूछा।

"तो आपको टैक्स बचत के साथ-साथ 12-15% का रिटर्न भी मिलता। FD में सिर्फ 6.5% मिल रहा है। प्लस, ELSS में सिर्फ 3 साल का लॉक-इन है, FD में 5 साल का। और सबसे बड़ी बात - मैच्योरिटी पर जो मुनाफा होगा वो भी 1 लाख तक टैक्स फ्री।"

विक्रम के चेहरे का रंग उड़ गया। उसने महसूस किया कि एक गलत निर्णय से उसने न सिर्फ कम रिटर्न पर समझौता किया बल्कि 2 साल का अतिरिक्त लॉक-इन भी झेला।

उस दिन के बाद विक्रम ने ELSS के बारे में विस्तार से जाना। आज वो हर साल ELSS में निवेश करता है और खुश है। आइये आज हम भी समझें कि ELSS क्या है, कैसे काम करता है, और कौन से ELSS फंड सबसे बेहतरीन हैं।

ELSS म्यूचुअल फंड है क्या?

ELSS का मतलब है Equity Linked Savings Scheme। ये एक खास तरह का म्यूचुअल फंड है जो आपको दो फायदे एक साथ देता है - वेल्थ क्रिएशन और टैक्स सेविंग।

जब आप ELSS में निवेश करते हैं, तो आपका पैसा शेयर बाजार में लगता है। फंड मैनेजर आपके पैसे से अलग-अलग कंपनियों के शेयर खरीदता है। ये कंपनियां बड़ी भी हो सकती हैं (लार्ज कैप), मीडियम साइज की भी (मिड कैप), और छोटी भी (स्मॉल कैप)।

सबसे बड़ी बात - धारा 80C के तहत डेढ़ लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। यानी अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में हैं और 1.5 लाख का निवेश करते हैं, तो सीधे 46,800 रुपये की टैक्स बचत (1,50,000 का 30% + 4% सेस)।

ELSS बाकी टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स से कैसे अलग है?

लॉक-इन पीरियड की तुलना

PPF: 15 साल (हालांकि 7 साल बाद आंशिक निकासी संभव)
NSC: 5 साल
टैक्स सेविंग FD: 5 साल
ELSS: सिर्फ 3 साल

ELSS का लॉक-इन सबसे कम है। तीन साल बाद आप पूरा पैसा निकाल सकते हैं या आगे निवेशित रख सकते हैं।

रिटर्न की तुलना

PPF: 7.1% (सरकार हर तिमाही तय करती है)
NSC: 7.7%
टैक्स सेविंग FD: 6-7%
ELSS: 12-15% औसत (लॉन्ग टर्म में)

ELSS में रिटर्न गारंटीड नहीं है क्योंकि ये शेयर बाजार पर निर्भर करता है। कभी 20% भी हो सकता है, कभी 5% भी। लेकिन लंबी अवधि में देखें तो औसत 12-15% रहता है जो बाकी सभी से बेहतर है।

टैक्स ट्रीटमेंट

PPF: EEE (निवेश, ब्याज, मैच्योरिटी - सब टैक्स फ्री)
NSC/FD: निवेश पर छूट, लेकिन ब्याज टैक्सेबल
ELSS: निवेश पर छूट, 1 लाख तक का मुनाफा टैक्स फ्री, उसके बाद 10%

लिक्विडिटी

PPF में 7 साल बाद आंशिक निकासी, NSC और FD में बीच में तोड़ने पर पेनाल्टी। ELSS में 3 साल तक बिल्कुल नहीं निकाल सकते, लेकिन 3 साल बाद पूरी तरह फ्री। कोई पेनाल्टी नहीं, कोई रोक-टोक नहीं।

ELSS में निवेश क्यों करें?

फायदा 1: डबल बेनिफिट

आपको टैक्स भी बचता है और वेल्थ भी बनती है। PPF में सिर्फ 7% मिलता है लेकिन ELSS में 12-15% का औसत रिटर्न। तीन साल में 1.5 लाख का निवेश PPF में 1.83 लाख हो जाता है, ELSS में 2.1 लाख तक हो सकता है।

फायदा 2: इन्फ्लेशन को मात

महंगाई सालाना 5-6% बढ़ती है। अगर आपका रिटर्न भी 6-7% है तो असली मायनों में आप कुछ नहीं कमा रहे। ELSS में 12-15% रिटर्न मतलब महंगाई के बाद भी आपकी पर्चेजिंग पावर बढ़ रही है।

फायदा 3: कम लॉक-इन

अगर आपको 5 साल बाद पैसों की जरूरत लगती है तो PPF या NSC में फंस जाएंगे। ELSS में 3 साल बाद निकाल लें। ये फ्लेक्सिबिलिटी बहुत काम आती है।

फायदा 4: SIP की सुविधा

ELSS में आप SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिये हर महीने 500 रुपये से भी शुरुआत कर सकते हैं। एकमुश्त डेढ़ लाख की जरूरत नहीं। हर महीने 12,500 रुपये जमा करते रहिये, साल के अंत में 1.5 लाख हो जाएगा।

फायदा 5: प्रोफेशनल मैनेजमेंट

आपको शेयर बाजार की समझ नहीं है? कोई बात नहीं। फंड मैनेजर के पास सालों का अनुभव और पूरी रिसर्च टीम है। वो आपके पैसे को सही जगह निवेश करेगा।

ELSS चुनते समय क्या देखें?

पहला पैमाना: लंबी अवधि का परफॉर्मेंस

किसी भी ELSS फंड को चुनने से पहले उसका पिछले 5-7 साल का रिकॉर्ड जरूर देखें। सिर्फ पिछले 1 साल का परफॉर्मेंस मत देखिये - वो भ्रामक हो सकता है। कोई फंड पिछले साल 25% दे सकता है लेकिन 5 साल में औसत सिर्फ 10%।

दूसरा पैमाना: कंसिस्टेंसी

फंड का रिटर्न स्थिर होना चाहिए। अगर कोई फंड एक साल 30% देता है, अगले साल -5%, फिर 20%, फिर 5% - ये अच्छा संकेत नहीं। ऐसा फंड चुनें जो हर साल 10-15% के बीच लगातार रिटर्न दे रहा हो।

तीसरा पैमाना: फंड मैनेजर का अनुभव

फंड मैनेजर कितने सालों से इस फंड को संभाल रहा है? अगर फंड मैनेजर हर साल बदल रहा है तो दिक्कत की बात है। एक अनुभवी फंड मैनेजर जो 5-7 साल से उसी फंड के साथ है, बेहतर होता है।

चौथा पैमाना: एक्सपेंस रेशियो

ये वो शुल्क है जो फंड हाउस हर साल लेता है। अगर एक्सपेंस रेशियो 2.5% है तो आपके रिटर्न में से 2.5% कट जाएगा। कोशिश करें कि 2% से कम एक्सपेंस रेशियो वाला फंड चुनें।

पांचवां पैमाना: AUM (Assets Under Management)

फंड का साइज भी मायने रखता है। बहुत छोटा फंड (100 करोड़ से कम) रिस्की हो सकता है। बहुत बड़ा फंड (10,000 करोड़ से ज्यादा) में चपलता की कमी हो सकती है। आदर्श रूप से 1000-5000 करोड़ के बीच का फंड अच्छा रहता है।

छठा पैमाना: पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन

फंड ने कितनी कंपनियों में निवेश किया है? अगर सिर्फ 10-15 कंपनियों में है तो रिस्क ज्यादा। 40-60 कंपनियों में निवेश बेहतर है। साथ ही देखें कि किन सेक्टर्स में निवेश है - सिर्फ एक-दो सेक्टर में नहीं होना चाहिए।

बेहतरीन ELSS फंड्स की विशेषताएं

चूंकि फंड्स के नाम और रैंकिंग बदलती रहती है, हम यहां उन विशेषताओं पर फोकस करेंगे जो अच्छे ELSS फंड में होनी चाहिए:

टाइप 1: लार्ज कैप फोकस्ड ELSS

ये फंड ज्यादातर बड़ी, स्थापित कंपनियों में निवेश करते हैं। जोखिम कम, रिटर्न स्थिर। अगर आप रिस्क कम लेना चाहते हैं तो ये सही है। औसत रिटर्न 10-12% रहता है।

किसके लिए: कंजर्वेटिव निवेशक, जो लोग पहली बार ELSS में निवेश कर रहे हैं, 50 साल से ऊपर की उम्र के लोग

टाइप 2: मल्टी-कैप ELSS

इसमें लार्ज, मिड और स्मॉल - सभी तरह की कंपनियों में निवेश होता है। संतुलित रिस्क, अच्छा रिटर्न। सबसे पॉपुलर कैटेगरी। औसत रिटर्न 12-14%।

किसके लिए: मध्यम रिस्क लेने वाले निवेशक, 30-50 साल की उम्र, जो लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं

टाइप 3: मिड और स्मॉल कैप फोकस्ड ELSS

ये छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों में ज्यादा निवेश करते हैं। रिस्क ज्यादा लेकिन रिटर्न भी ज्यादा (15-18% तक)। बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है।

किसके लिए: एग्रेसिव निवेशक, 25-35 साल की उम्र, जिनके पास दूसरे निवेश भी हैं और ये अतिरिक्त है

ELSS में निवेश कैसे करें - स्टेप बाय स्टेप

चरण 1: KYC पूरा करें

सबसे पहले अपना KYC (Know Your Customer) पूरा करें। इसके लिए PAN कार्ड, आधार कार्ड और बैंक डिटेल्स चाहिए। एक बार KYC हो गया तो सभी म्यूचुअल फंड हाउस में काम करेगा।

चरण 2: प्लेटफॉर्म चुनें

तीन तरीके हैं: AMC की वेबसाइट से सीधे, डिस्ट्रीब्यूटर के जरिये, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (Groww, Zerodha Coin, Paytm Money)। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सबसे आसान हैं।

चरण 3: डायरेक्ट प्लान चुनें

हर फंड के दो प्लान होते हैं - Regular और Direct। हमेशा Direct प्लान लें। इसमें डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन नहीं कटता तो 1-1.5% ज्यादा रिटर्न मिलता है।

चरण 4: SIP या लम्पसम तय करें

अगर एकमुश्त 1.5 लाख है तो लम्पसम कर सकते हैं। नहीं तो SIP शुरू करें - हर महीने 12,500 रुपये (या जितना बचा सकें)। SIP में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है।

चरण 5: निवेश करें और ट्रैक करें

ऐप या वेबसाइट पर जाएं, फंड सेलेक्ट करें, अमाउंट डालें, पेमेंट करें। बस, हो गया। अब हर तिमाही में एक बार परफॉर्मेंस चेक करते रहें।

SIP vs Lumpsum - ELSS के लिए क्या बेहतर?

लम्पसम के फायदे:

अगर बाजार नीचे है तो एकमुश्त निवेश से पूरा फायदा उठा सकते हैं। जितनी जल्दी पैसा लगेगा, उतनी जल्दी कंपाउंडिंग शुरू होगी। अगर आपको बाजार की समझ है और मार्केट टाइमिंग कर सकते हैं, तो लम्पसम अच्छा है।

SIP के फायदे:

बाजार ऊपर हो या नीचे, आपको चिंता नहीं करनी। हर महीने निवेश होता रहेगा। बाजार गिरा तो ज्यादा यूनिट्स मिलेंगी, बढ़ा तो कम यूनिट्स। औसत में सब बराबर हो जाता है। ज्यादातर लोगों के लिए SIP बेहतर है क्योंकि मार्केट टाइमिंग मुश्किल है।

कॉम्बिनेशन स्ट्रेटजी:

अगर आपके पास अभी 75,000 रुपये हैं और बाजार नीचे है, तो वो लम्पसम कर दो। बाकी 75,000 के लिए 6 महीने की SIP शुरू करो (12,500 महीने)। इससे दोनों का फायदा मिलेगा।

ELSS में निवेश की आम गलतियां

❌ गलती 1: मार्च में भागदौड़

मार्च के आखिरी हफ्ते में अचानक याद आता है कि टैक्स बचाना है। तो जल्दबाजी में कोई भी ELSS ले लेते हैं। ये गलत है। अप्रैल से ही प्लानिंग शुरू करें और SIP के जरिये पूरे साल निवेश करें।

❌ गलती 2: हर साल नया फंड लेना

बहुत से लोग हर साल अलग ELSS फंड में निवेश करते हैं। इससे ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है और कोई लॉन्ग टर्म स्ट्रेटजी नहीं बन पाती। एक-दो अच्छे फंड चुनें और उनमें लगातार निवेश करें।

❌ गलती 3: 3 साल बाद तुरंत निकाल लेना

ELSS का लॉक-इन 3 साल है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि 3 साल बाद जरूर निकालना है। अगर फंड अच्छा परफॉर्म कर रहा है और आपको पैसों की जरूरत नहीं, तो आगे भी रखें। लंबी अवधि में और बेहतर रिटर्न मिलेगा।

❌ गलती 4: सिर्फ पिछले साल का परफॉर्मेंस देखना

कोई फंड पिछले साल टॉप परफॉर्मर रहा, तो सब उसी में निवेश करने लगते हैं। लेकिन पिछला परफॉर्मेंस भविष्य की गारंटी नहीं। कम से कम 5 साल का ट्रैक रिकॉर्ड देखें।

❌ गलती 5: घबराकर बेच देना

बाजार गिरा और आपका ELSS फंड -10% में चला गया। पैनिक में निकाल लिया (3 साल के बाद)। ये सबसे बड़ी गलती है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। धैर्य रखें, लंबी अवधि में सब ठीक हो जाता है।

ELSS के बारे में महत्वपूर्ण नियम

नियम 1: 3 साल का लॉक-इन हर SIP पर अलग-अलग

अगर आप 12 महीने तक SIP करते हैं, तो पहले महीने की SIP 3 साल बाद मुक्त होगी, दूसरे महीने की उससे एक महीने बाद, और ऐसे ही। यानी सभी SIP एक साथ नहीं खुलतीं।

नियम 2: डिविडेंड vs ग्रोथ ऑप्शन

ELSS में दो ऑप्शन होते हैं - Dividend और Growth। हमेशा Growth चुनें। इसमें कंपाउंडिंग का पूरा फायदा मिलता है। Dividend में बीच-बीच में पैसा निकल जाता है और रिटर्न कम होता है।

नियम 3: टैक्स पर टैक्स का झंझट नहीं

मैच्योरिटी पर 1 लाख तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स फ्री है। उसके बाद 10% टैक्स। लेकिन ये बहुत कम है और ऊपर से आपको निवेश के समय 80C की छूट मिली थी। डबल बेनिफिट।

नियम 4: स्विचिंग की सुविधा नहीं

आप ELSS फंड को 3 साल तक किसी दूसरे फंड में स्विच नहीं कर सकते। एक बार जो फंड चुना, 3 साल के लिए उसी में लॉक हो गए। इसलिए सोच-समझकर चुनें।

नियम 5: नॉमिनी जरूर बनाएं

ELSS में निवेश करते समय नॉमिनी का नाम जरूर डालें। अगर आपको कुछ हो गया तो परिवार को पैसा मिलने में दिक्कत नहीं होगी।

टैक्स प्लानिंग में ELSS का सही उपयोग

पूरे 1.5 लाख का उपयोग करें

धारा 80C के तहत कुल 1.5 लाख तक की छूट मिलती है। इसमें PPF, EPF, LIC प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस, होम लोन प्रिंसिपल सब आता है। अगर इन सबको मिलाकर 1.5 लाख नहीं हो रहा, तो बाकी ELSS में डाल दें।

NPS के साथ कॉम्बिनेशन

NPS में अतिरिक्त 50,000 की छूट मिलती है (धारा 80CCD(1B))। तो स्मार्ट प्लान ये है: 1.5 लाख 80C में (कुछ ELSS, कुछ EPF, कुछ और) + 50,000 NPS में। कुल 2 लाख की छूट।

हर साल का निवेश अलग-अलग ट्रैक करें

2023 में 1.5 लाख डाला, 2024 में 1.5 लाख, 2025 में 1.5 लाख - ये तीनों अलग-अलग हैं। 2023 वाला 2026 में मुक्त होगा, 2024 वाला 2027 में। इस तरह हर साल कुछ न कुछ मुक्त होता रहेगा और आपके पास लिक्विडिटी बनी रहेगी।

विभिन्न उम्र के लोगों के लिए ELSS स्ट्रेटजी

25-35 साल की उम्र

आप जवान हैं, करियर शुरुआत में है, रिस्क ले सकते हैं। एग्रेसिव ELSS फंड चुनें जो मिड और स्मॉल कैप में ज्यादा निवेश करते हैं। 15-18% रिटर्न का टारगेट। 3 साल बाद भी पैसा मत निकालिये, 7-10 साल रखिये। कंपाउंडिंग का जादू देखेंगे।

35-50 साल की उम्र

अब जिम्मेदारियां हैं - बच्चों की पढ़ाई, घर की EMI, माता-पिता की देखभाल। बैलेंस्ड ELSS फंड चुनें जो लार्ज और मिड कैप में निवेश करते हैं। 12-14% रिटर्न का टारगेट। कुछ कंजर्वेटिव हो सकते हैं।

50 साल से ऊपर

रिटायरमेंट नजदीक है, रिस्क कम लेना चाहिए। लार्ज कैप फोकस्ड ELSS चुनें। 10-12% रिटर्न पर संतोष करें। या फिर ELSS के बजाय PPF और NSC पर ज्यादा फोकस करें जो ज्यादा सुरक्षित हैं।

क्या ELSS सबके लिए सही है?

ELSS सही है अगर:

→ आपको टैक्स बचाना है और साथ में अच्छा रिटर्न भी चाहिए
→ आप कम से कम 3 साल के लिए पैसा लगा सकते हैं
→ आप शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं
→ आप लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन करना चाहते हैं

ELSS सही नहीं है अगर:

→ आपको रिस्क बिल्कुल पसंद नहीं, गारंटीड रिटर्न चाहिए
→ आपको 2 साल में पैसों की जरूरत पड़ सकती है
→ बाजार गिरने पर आप घबरा जाते हैं और बेच देना चाहते हैं
→ आप शेयर बाजार को जुआ समझते हैं

ऐसे में PPF, NSC या टैक्स सेविंग FD बेहतर विकल्प हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या ELSS में SIP और लम्पसम दोनों कर सकते हैं?

हां, बिल्कुल। आप एक ही ELSS फंड में SIP भी चला सकते हैं और कभी भी लम्पसम भी डाल सकते हैं। दोनों के लॉक-इन अलग-अलग गिने जाएंगे। लचीलापन पूरा है।

Q2. क्या 3 साल से पहले इमरजेंसी में पैसा निकाल सकते हैं?

नहीं, ELSS में 3 साल का लॉक-इन सख्त है। किसी भी परिस्थिति में - मेडिकल इमरजेंसी, जॉब लॉस, कुछ भी हो - 3 साल से पहले नहीं निकाल सकते। इसलिए सिर्फ वही पैसा लगाएं जो 3 साल तक नहीं चाहिए।

Q3. अगर ELSS फंड घाटे में चल रहा है तो क्या करें?

धैर्य रखें। शेयर बाजार में अस्थायी उतार-चढ़ाव आम है। अगर फंड का लॉन्ग टर्म ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा है तो घबराएं नहीं। 3 साल पूरे होने दें, फिर देखें। ज्यादातर मामलों में रिकवरी हो जाती है।

Q4. क्या एक से ज्यादा ELSS फंड में निवेश कर सकते हैं?

हां, कर सकते हैं। लेकिन 3-4 से ज्यादा मत लीजिये, नहीं तो ट्रैक करना मुश्किल हो जाएगा। अच्छा तरीका है - एक लार्ज कैप फोकस्ड, एक मल्टी-कैप - दो अच्छे फंड काफी हैं।

Q5. क्या ELSS से मिले पैसे पर फिर से निवेश कर सकते हैं?

हां, 3 साल बाद जब ELSS मैच्योर हो तो आप वो पैसा दोबारा उसी या किसी दूसरे ELSS में लगा सकते हैं। फिर से 80C की छूट मिलेगी और फिर से 3 साल का लॉक-इन शुरू होगा।

Q6. क्या NRI ELSS में निवेश कर सकते हैं?

हां, NRI भी ELSS में निवेश कर सकते हैं लेकिन उन्हें भारतीय टैक्स कानूनों के हिसाब से टैक्स देना होगा। उन्हें 80C की छूट तभी मिलेगी जब वो भारत में रेजिडेंट की कैटेगरी में आते हों।


अंतिम सलाह

    विक्रम की कहानी याद है? आज वो स्मार्ट टैक्सपेयर बन गया है। हर साल अप्रैल से ही ELSS में SIP शुरू कर देता है। मार्च में कोई भागदौड़ नहीं। उसके पास अब एक अच्छा कॉर्पस बन गया है और टैक्स भी बचता है।

ELSS सिर्फ टैक्स सेविंग का जरिया नहीं, बल्कि वेल्थ क्रिएशन का शानदार तरीका है। लेकिन याद रखें:

सही फंड चुनें: लॉन्ग टर्म परफॉर्मेंस, कंसिस्टेंसी, अनुभवी फंड मैनेजर वाला

धैर्य रखें: 3 साल मिनिमम है, 5-7 साल और बेहतर

SIP का रास्ता अपनाएं: हर महीने निवेश करें, मार्केट टाइमिंग की टेंशन छोड़ें

डायवर्सिफाई करें: सिर्फ ELSS नहीं, दूसरी जगह भी निवेश करें

रिव्यू करें: साल में एक-दो बार परफॉर्मेंस चेक करें

और सबसे जरूरी - जल्दी शुरू करें। जितनी जल्दी शुरुआत, उतना ज्यादा कंपाउंडिंग का फायदा। 25 साल की उम्र में 10 साल तक हर साल 1.5 लाख ELSS में डालें, 35 साल की उम्र तक 30-35 लाख का कॉर्पस बन जाएगा। ये सिर्फ टैक्स सेविंग से!

आपका टैक्स बचे, आपकी संपत्ति बढ़े - ELSS के साथ दोनों संभव है!


⚠ Disclaimer

यह लेख केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ELSS, म्यूचुअल फंड रिटर्न, टैक्स नियम, धारा 80C की सीमा और कैपिटल गेन टैक्स से संबंधित नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।

म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं है। निवेश करने से पहले स्कीम संबंधित दस्तावेज ध्यान से पढ़ें और अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार निर्णय लें।

किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या कर विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। इस लेख में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी लाभ या हानि के लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे।

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