GDP Deflator vs CPI vs WPI क्या है? अंतर, उदाहरण और RBI में उपयोग (Complete Guide)

 GDP Deflator vs CPI vs WPI क्या है? अंतर, उदाहरण और RBI में उपयोग (Complete Guide)

GDP Deflator vs CPI vs WPI: जब तीन संख्याएं तीन अलग कहानियां सुनाएं

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    2013 की एक सामान्य सुबह, वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी अपने कंप्यूटर स्क्रीन को घूर रहे थे। सामने तीन अलग-अलग रिपोर्ट थीं। पहली रिपोर्ट कह रही थी कि महंगाई 10.5% है। दूसरी कह रही थी 6.2%। और तीसरी बता रही थी 5.8%।

    अधिकारी ने फोन उठाया और अपने सीनियर से पूछा - "सर, असली महंगाई कितनी है? इन तीनों में से किसे मानें?"

जवाब मिला - "तीनों सही हैं। बस तीनों अलग-अलग चीजें माप रहे हैं।"

यही है GDP Deflator, CPI और WPI की पहेली। तीनों महंगाई मापते हैं, लेकिन तीनों की अपनी-अपनी भाषा है, अपना नजरिया है, और अपनी कहानी है। आज हम इन तीनों को गहराई से समझेंगे और देखेंगे कि कौन सा किस स्थिति में ज्यादा सही है।


सबसे पहले - महंगाई को मापना क्यों जरूरी है

    महंगाई मापना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह तय करता है कि सरकार कौन सी नीति अपनाएगी। अगर महंगाई ज्यादा है तो RBI ब्याज दरें बढ़ा देगा। अगर कम है तो घटा देगा। सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता (DA) भी इसी से तय होता है।

    लेकिन समस्या यह है कि महंगाई को मापने के कई तरीके हैं। किसान के लिए महंगाई का मतलब कुछ और है, शहरी मजदूर के लिए कुछ और, और IT प्रोफेशनल के लिए कुछ और।

    इसीलिए तीन अलग-अलग सूचकांक हैं - WPI (थोक मूल्य सूचकांक), CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक), और GDP Deflator (जीडीपी अपस्फीतिकारक)। हर एक की अपनी भूमिका है।


WPI - थोक मूल्य सूचकांक क्या है

    WPI यानी Wholesale Price Index वह सूचकांक है जो थोक स्तर पर (यानी बड़े व्यापारियों के बीच) कीमतों में बदलाव को मापता है। यह सबसे पुराना सूचकांक है जो भारत में 1942 से इस्तेमाल हो रहा है।

A) WPI क्या-क्या मापता है

WPI में तीन मुख्य श्रेणियां होती हैं:

प्राथमिक वस्तुएं (Primary Articles): इसमें खाद्य पदार्थ, खनिज, कच्चा तेल जैसी चीजें आती हैं। इसका वेटेज करीब 22.6% है।

ईंधन और ऊर्जा (Fuel & Power): कोयला, पेट्रोल, डीजल, बिजली इत्यादि। इसका वेटेज करीब 13.2% है।

विनिर्मित उत्पाद (Manufactured Products): फैक्ट्रियों में बनने वाली सभी चीजें - कपड़ा, दवाइयां, मशीनरी, सीमेंट, स्टील इत्यादि। इसका वेटेज सबसे ज्यादा है - करीब 64.2%।

B) WPI की गणना कैसे होती है

    WPI में 697 वस्तुओं की कीमतें track की जाती हैं। एक base year चुना जाता है (वर्तमान में 2011-12) और फिर हर महीने इन वस्तुओं की थोक कीमतों की तुलना base year से की जाती है।

उदाहरण: मान लीजिए 2011-12 में गेहूं की थोक कीमत 1000 रुपये प्रति क्विंटल थी। अब 2024 में यह 2000 रुपये है। तो गेहूं के लिए WPI 200 है (यानी 100% वृद्धि)।

C) WPI का इस्तेमाल कहां होता है

    WPI का इस्तेमाल मुख्य रूप से व्यापारिक निर्णयों में होता है। कंपनियां इससे देखती हैं कि कच्चे माल की कीमतें कैसे बदल रही हैं। सरकार भी कुछ अनुबंधों में WPI का इस्तेमाल करती है।

    पहले RBI भी WPI को ही मौद्रिक नीति का आधार बनाता था। लेकिन 2014 से RBI ने CPI को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया।


CPI - उपभोक्ता मूल्य सूचकांक क्या है

CPI यानी Consumer Price Index वह सूचकांक है जो आम उपभोक्ता द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को मापता है। यह सीधे आपकी और मेरी जेब से जुड़ा है।

1. CPI के प्रकार

भारत में तीन तरह के CPI होते हैं:

1. CPI-IW (Industrial Workers): औद्योगिक मजदूरों के लिए। इससे उनका DA (महंगाई भत्ता) तय होता है।

2. CPI-AL (Agricultural Labourers): खेतिहर मजदूरों के लिए।

3. CPI-RL (Rural Labourers): ग्रामीण मजदूरों के लिए।

    लेकिन 2011 से एक नया Combined CPI या CPI-National भी आया जो सभी तरह के उपभोक्ताओं को कवर करता है। अब यही मुख्य CPI माना जाता है।

2. CPI में क्या-क्या शामिल है

CPI में छह मुख्य श्रेणियां हैं:

खाद्य और पेय पदार्थ: सब्जी, फल, दूध, अनाज, मांस इत्यादि। इसका वेटेज सबसे ज्यादा - करीब 45.9%।

पान, तंबाकू और नशीले पदार्थ: 2.4% वेटेज।

कपड़े और जूते: 6.5% वेटेज।

आवास: किराया, मरम्मत इत्यादि। 10.1% वेटेज।

ईंधन और रोशनी: रसोई गैस, बिजली, मिट्टी का तेल। 6.8% वेटेज।

विविध: शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, मनोरंजन इत्यादि। 28.3% वेटेज।

3. CPI की खासियत

    CPI की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सेवाएं भी शामिल हैं। डॉक्टर की फीस, स्कूल की फीस, नाई की दुकान, रेस्तरां का खर्च - सब कुछ। WPI में सिर्फ सामान (goods) होते हैं, सेवाएं नहीं।

    आजकल भारत में GDP का 55% से ज्यादा services sector से आता है। इसलिए CPI ज्यादा व्यापक और सटीक तस्वीर देता है।

4. CPI का महत्व

    2016 से RBI ने Inflation Targeting शुरू किया। लक्ष्य है कि CPI inflation 4% के आसपास रहे (±2% के साथ)। यानी 2% से 6% के बीच। अगर CPI इस दायरे से बाहर जाता है तो RBI को जवाब देना पड़ता है।

    सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों का DA भी CPI-IW के आधार पर तय होता है। यह लाखों लोगों की जेब को सीधे प्रभावित करता है।


GDP Deflator - सबसे व्यापक लेकिन कम चर्चित

    GDP Deflator सबसे कम चर्चित लेकिन सबसे व्यापक सूचकांक है। यह पूरी अर्थव्यवस्था में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को मापता है।

A) GDP Deflator क्या है

GDP Deflator = (Nominal GDP / Real GDP) × 100

Nominal GDP: वर्तमान कीमतों पर GDP (जितनी कीमतें अभी हैं)।

Real GDP: स्थिर कीमतों पर GDP (एक base year की कीमतों पर)।

मान लीजिए 2020 में भारत की GDP 150 लाख करोड़ रुपये थी। अगर हम इसे 2011-12 की कीमतों पर गिनें तो यह 120 लाख करोड़ आती है। तो GDP Deflator = (150/120) × 100 = 125।

इसका मतलब है कि 2011-12 के मुकाबले कीमतें 25% बढ़ गई हैं।

B) GDP Deflator की खासियत

सबसे व्यापक: यह पूरी अर्थव्यवस्था को कवर करता है। हर वह चीज जो GDP में गिनी जाती है - चाहे वह गेहूं हो, कार हो, मोबाइल सेवा हो, या बैंकिंग सेवा।

आयात शामिल नहीं: WPI और CPI में आयातित सामान की कीमतें भी गिनी जाती हैं। लेकिन GDP Deflator में सिर्फ देश में उत्पादित चीजों की कीमतें आती हैं। अगर पेट्रोल की कीमत बढ़ती है (जो हम import करते हैं) तो CPI और WPI में दिखेगा लेकिन GDP Deflator में उतना नहीं।

वेटेज बदलता रहता है: CPI और WPI में हर वस्तु का एक fixed वेटेज होता है। लेकिन GDP Deflator में वेटेज हर साल बदलता है - जिस चीज का उत्पादन ज्यादा होता है उसका वेटेज ज्यादा हो जाता है।

C) GDP Deflator का इस्तेमाल

    GDP Deflator का मुख्य इस्तेमाल economists और policymakers द्वारा किया जाता है। यह बताता है कि देश की कुल उत्पादन लागत कितनी बढ़ रही है।

यह deflator Real GDP निकालने में भी इस्तेमाल होता है। जब सरकार कहती है कि "इस साल GDP 7% बढ़ी", तो यह real GDP होता है जिसे nominal GDP में से inflation निकालकर पाया जाता है।


तीनों का तुलनात्मक विश्लेषण

अब आते हैं असली सवाल पर - इन तीनों में क्या फर्क है और कौन सा कब इस्तेमाल करें?

तुलना तालिका

कवरेज:

  • WPI: सिर्फ सामान (goods), थोक स्तर
  • CPI: सामान + सेवाएं, खुदरा स्तर
  • GDP Deflator: सभी उत्पादित सामान + सेवाएं

आयातित वस्तुएं:

  • WPI: शामिल
  • CPI: शामिल
  • GDP Deflator: शामिल नहीं

वेटेज:

  • WPI: Fixed (base year के अनुसार)
  • CPI: Fixed (base year के अनुसार)
  • GDP Deflator: बदलता रहता है

वस्तुओं की संख्या:

  • WPI: 697 वस्तुएं
  • CPI: 260 वस्तुएं
  • GDP Deflator: सभी उत्पादित वस्तुएं/सेवाएं

Base Year:

  • WPI: 2011-12
  • CPI: 2012
  • GDP Deflator: बदलता रहता है (latest 2011-12)

मुख्य उपयोगकर्ता:

  • WPI: व्यापारी, कंपनियां
  • CPI: RBI, सरकार, आम जनता
  • GDP Deflator: अर्थशास्त्री, शोधकर्ता

व्यावहारिक उदाहरण - 2020-21 की वास्तविक स्थिति

कोविड के दौरान (2020-21) तीनों सूचकांकों ने अलग-अलग कहानियां सुनाईं:

WPI inflation: 2020 में नकारात्मक था (-0.6%), फिर 2021 में तेजी से बढ़कर 12-13% हो गया। क्यों? क्योंकि थोक स्तर पर कच्चे तेल, धातुओं और commodities की कीमतें बहुत बढ़ गईं।

CPI inflation: 2020 में भी 6-7% के आसपास रहा। क्यों? क्योंकि lockdown में सब्जियों की कीमतें बढ़ गई थीं, परिवहन महंगा हो गया था। 2021 में यह थोड़ा कम हुआ।

GDP Deflator: 2020 में करीब 3% रहा। क्यों? क्योंकि हालांकि कुछ चीजें महंगी हुईं लेकिन overall economic output कम था, और services sector (जो GDP का बड़ा हिस्सा है) में ज्यादा inflation नहीं था।

इस उदाहरण से साफ है कि तीनों अलग-अलग पहलुओं को पकड़ते हैं।


कौन सा सूचकांक कब उपयोगी है

WPI का उपयोग:

• थोक व्यापार में निर्णय लेने के लिए • कच्चे माल की कीमतों का अनुमान लगाने के लिए • Business-to-business contracts में • Export-import pricing में

CPI का उपयोग:

• RBI की मौद्रिक नीति तय करने के लिए (सबसे महत्वपूर्ण) • महंगाई भत्ता (DA) तय करने के लिए • आम जनता की क्रय शक्ति मापने के लिए • वेतन समझौतों में

GDP Deflator का उपयोग:

• Real GDP निकालने के लिए • पूरी अर्थव्यवस्था की कीमत स्थिति समझने के लिए • Academic research में • Long-term economic planning में


सूचकांकों की सीमाएं

हर सूचकांक की अपनी सीमाएं हैं:

WPI की सीमाएं:

• सेवाओं को शामिल नहीं करता (जबकि services अब GDP का 55% हैं) • खुदरा कीमतों को नहीं पकड़ता • आम आदमी के खर्च से सीधे जुड़ा नहीं

CPI की सीमाएं:

• Fixed basket है - लोगों की consumption patterns बदलती रहती हैं • शहरी और ग्रामीण महंगाई में बड़ा अंतर हो सकता है • Quality improvements को सही से नहीं पकड़ता

GDP Deflator की सीमाएं:

• Monthly या quarterly data नहीं मिलता, सिर्फ annual • आयातित inflation को miss कर सकता है • आम जनता के लिए समझना मुश्किल


भारत में सूचकांकों का विकास

1942: WPI शुरू हुआ। तब सिर्फ 23 commodities track होती थीं।

1950s-60s: CPI-IW शुरू हुआ औद्योगिक मजदूरों के लिए।

2011: नया Combined CPI शुरू हुआ जो सभी groups को cover करता है।

2014: RBI ने WPI के बजाय CPI को अपनी मौद्रिक नीति का आधार बनाया।

2017: WPI का base year 2011-12 कर दिया गया (पहले 2004-05 था)।

2020: WPI में कुछ बदलाव किए गए - अब 697 items track होती हैं (पहले 676 थीं)।


अंतरराष्ट्रीय तुलना

दुनिया के ज्यादातर देश CPI को ही मुख्य inflation indicator मानते हैं।

अमेरिका: CPI और PCE (Personal Consumption Expenditure) दोनों इस्तेमाल होते हैं। Federal Reserve मुख्य रूप से PCE देखता है।

यूरोप: HICP (Harmonised Index of Consumer Prices) इस्तेमाल होता है।

ब्रिटेन: CPI और RPI (Retail Price Index) दोनों publish होते हैं।

GDP Deflator लगभग सभी देश निकालते हैं लेकिन यह मुख्य रूप से academic और policy analysis के लिए होता है।

WPI जैसा सूचकांक कुछ ही देशों में होता है। ज्यादातर developed countries ने इसे discontinue कर दिया है।


परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

• भारत में तीन मुख्य inflation indicators हैं - WPI, CPI और GDP Deflator

• WPI में 697 वस्तुएं, base year 2011-12

• CPI में 260 वस्तुएं, base year 2012

• RBI inflation targeting में CPI का लक्ष्य 4% (±2%)

• WPI में सेवाएं शामिल नहीं, CPI में हैं

• GDP Deflator = (Nominal GDP / Real GDP) × 100

• CPI में खाद्य पदार्थों का वेटेज सबसे ज्यादा - 45.9%

• WPI में manufactured products का वेटेज सबसे ज्यादा - 64.2%

• GDP Deflator में आयातित वस्तुएं शामिल नहीं

• 2014 से RBI, CPI को मौद्रिक नीति का आधार बनाता है


निष्कर्ष

    तो असल में तीनों सूचकांक तीन अलग-अलग कैमरों से एक ही तस्वीर खींच रहे हैं - महंगाई की तस्वीर। WPI थोक बाजार का कैमरा है, CPI आम आदमी की रसोई का, और GDP Deflator पूरी अर्थव्यवस्था का panoramic view।

    कोई एक "सबसे अच्छा" नहीं है। हर एक की अपनी जगह है। लेकिन अगर आपको सिर्फ एक चुनना हो जो आपकी जेब से सबसे ज्यादा जुड़ा है, तो वह CPI है। यही कारण है कि RBI ने 2014 से CPI को अपनी मौद्रिक नीति का केंद्र बना दिया।

    अगली बार जब आप सुनें कि "महंगाई बढ़ी है", तो पूछिए - "कौन सी महंगाई? WPI, CPI या GDP Deflator?" क्योंकि तीनों की अपनी कहानी होती है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: WPI और CPI में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर: WPI थोक स्तर पर सिर्फ सामान (goods) की कीमतें मापता है। CPI खुदरा स्तर पर सामान और सेवाओं दोनों की कीमतें मापता है। WPI में 697 वस्तुएं हैं जबकि CPI में 260। सबसे बड़ा अंतर - CPI में सेवाएं (शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन) शामिल हैं लेकिन WPI में नहीं।

प्रश्न 2: RBI मौद्रिक नीति के लिए कौन सा सूचकांक इस्तेमाल करता है?

उत्तर: 2014 से पहले RBI मुख्य रूप से WPI देखता था। लेकिन 2014 से RBI ने CPI को अपनी मौद्रिक नीति का आधार बना दिया। अब RBI का लक्ष्य है कि CPI inflation 4% (±2%) के बीच रहे। यानी 2% से 6% का दायरा।

प्रश्न 3: GDP Deflator और CPI में क्या फर्क है?

उत्तर: GDP Deflator पूरी अर्थव्यवस्था में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं को कवर करता है और इसमें आयातित सामान शामिल नहीं होते। CPI में एक fixed basket होती है जिसमें आयातित सामान भी शामिल हैं। GDP Deflator का वेटेज हर साल बदलता है जबकि CPI का fixed रहता है। GDP Deflator ज्यादा व्यापक लेकिन CPI ज्यादा relatable है।

प्रश्न 4: क्या तीनों सूचकांक एक साथ बढ़ते या घटते हैं?

उत्तर: जरूरी नहीं। कई बार तीनों अलग-अलग दिशा में जा सकते हैं। उदाहरण: 2020 में WPI negative था लेकिन CPI positive। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तीनों अलग-अलग चीजें मापते हैं। WPI commodities पर ज्यादा निर्भर है, CPI खाद्य पदार्थों पर, और GDP Deflator services पर भी।

प्रश्न 5: सरकारी कर्मचारियों का DA किस सूचकांक से तय होता है?

उत्तर: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारकों का DA, CPI-IW (Consumer Price Index for Industrial Workers) के आधार पर तय होता है। हर 6 महीने में DA revise होता है। जनवरी और जुलाई में पिछले 6 महीनों के CPI-IW के average के आधार पर DA बढ़ाया या घटाया जाता है।

प्रश्न 6: Base year क्या होता है और क्यों बदला जाता है?

उत्तर: Base year वह साल होता है जिसे 100 मानकर बाकी सालों की तुलना की जाती है। Base year को समय-समय पर बदलना पड़ता है क्योंकि अर्थव्यवस्था में structural changes होते हैं - नई चीजें आती हैं, consumption patterns बदलते हैं। WPI का base year 2011-12 है और CPI का 2012। हर 10-15 साल में base year update होना चाहिए।

प्रश्न 7: अगर WPI ज्यादा है और CPI कम तो इसका क्या मतलब है?

उत्तर: इसका मतलब है कि थोक स्तर पर (कच्चे माल, commodities) कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं लेकिन खुदरा स्तर पर आम उपभोक्ता को अभी उतना असर नहीं पहुंचा है। यह cost-push inflation का संकेत हो सकता है। आगे चलकर CPI भी बढ़ सकता है जब companies अपनी बढ़ी लागत को consumers पर डालेंगी।

प्रश्न 8: GDP Deflator negative हो सकता है?

उत्तर: हां, GDP Deflator negative हो सकता है अगर Nominal GDP, Real GDP से कम हो। इसका मतलब है deflation - यानी कीमतें घट रही हैं। यह आमतौर पर गंभीर मंदी का संकेत होता है। जापान में 1990-2000 के दशक में ऐसा हुआ था।

प्रश्न 9: क्यों CPI में खाद्य पदार्थों का वेटेज इतना ज्यादा (45.9%) है?

उत्तर: क्योंकि भारतीय परिवारों का औसत खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग आधा) खाद्य पदार्थों पर जाता है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों में यह प्रतिशत और भी ज्यादा है। इसलिए CPI में खाद्य महंगाई को ज्यादा वेटेज दिया गया है ताकि आम आदमी की असली स्थिति पकड़ में आए।

प्रश्न 10: Core inflation क्या होता है?

उत्तर: Core inflation वह inflation है जिसमें से खाद्य और ईंधन की कीमतों को निकाल दिया जाता है क्योंकि ये बहुत volatile होती हैं (मौसम, अंतरराष्ट्रीय बाजार से प्रभावित)। Core inflation underlying trend दिखाता है। RBI core inflation को भी देखता है क्योंकि यह मौद्रिक नीति के असर को बेहतर दर्शाता है। CPI से खाद्य और ईंधन हटाने पर Core CPI मिलता है।

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