CRR और SLR क्या है? अंतर, महत्व और RBI की भूमिका। Complete Guide

CRR और SLR क्या है? अंतर, महत्व और RBI की भूमिका। Complete Guide
CRR और SLR क्या है? Cash Reserve Ratio और SLR में अंतर

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        रात के 2 बजे थे। एक बैंक मैनेजर अपने ऑफिस में बैठा परेशान था। कल सुबह तक उसके बैंक को RBI के पास ₹500 करोड़ cash जमा करना था। लेकिन आज बहुत से लोगों ने पैसे निकाल लिए थे। अब vault में सिर्फ ₹400 करोड़ बचे हैं।

"अगर कल तक ₹500 करोड़ नहीं जमा किए तो RBI भारी जुर्माना लगाएगा," वो सोच रहा था। "लेकिन इतना पैसा कहां से लाऊं? ग्राहकों को तो पैसे देने ही होंगे।"

यही है CRR और SLR का खेल - एक ऐसा नियम जो बैंकों को हर वक्त एक निश्चित रकम अलग रखने पर मजबूर करता है। लेकिन क्यों? आज मैं आपको इस पूरे रहस्य से परदा उठाऊंगा।


CRR क्या है - सबसे आसान परिभाषा

    कल्पना कीजिए कि आपने अपने 10 दोस्तों से ₹100-100 उधार लिए। अब आपके पास ₹1,000 हैं। लेकिन आपकी माँ कहती हैं, "इसमें से ₹40 मेरे पास जमा रख दो। बाकी ₹960 से जो मर्जी करो।" यह ₹40 आपातकाल के लिए safe रखा जा रहा है।

बिल्कुल यही होता है बैंकों के साथ। जब आप बैंक में ₹10,000 जमा करते हैं, तो बैंक उसका एक हिस्सा RBI के पास cash में रखना पड़ता है। इसे Cash Reserve Ratio (CRR) कहते हैं।

CRR = वह प्रतिशत जो बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का RBI के पास नकद में रखना अनिवार्य है।

वर्तमान CRR: लगभग 4-4.5% के आसपास रहता है (RBI समय-समय पर बदलता है)

आसान उदाहरण

मान लीजिए SBI के पास ग्राहकों की ₹10,000 करोड़ की जमा राशि है। अगर CRR 4% है तो:

CRR Amount = ₹10,000 × 4% = ₹400 करोड़

यह ₹400 करोड़ SBI को RBI के पास cash में जमा करना होगा। बाकी ₹9,600 करोड़ से लोन दे सकता है, निवेश कर सकता है।

महत्वपूर्ण बात: इस ₹400 करोड़ पर SBI को कोई ब्याज नहीं मिलता! यह पूरी तरह lock हो जाता है।


SLR क्या है - दूसरा नियम

    अब दूसरी स्थिति। आपकी माँ कहती हैं, "₹960 में से भी ₹180 सरकारी बचत योजना में डाल दो। उस पर ब्याज भी मिलेगा और सुरक्षित भी रहेगा।"

यही है Statutory Liquidity Ratio (SLR)। इसमें बैंकों को अपनी जमा राशि का एक हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों, सोना या approved securities में रखना पड़ता है।

SLR = वह प्रतिशत जो बैंकों को अपनी जमा राशि का liquid assets (सरकारी bonds, gold आदि) में रखना अनिवार्य है।

वर्तमान SLR: लगभग 18% के आसपास रहता है

आसान उदाहरण

वही SBI, ₹10,000 करोड़ की जमा राशि। अगर SLR 18% है तो:

SLR Amount = ₹10,000 × 18% = ₹1,800 करोड़

यह ₹1,800 करोड़ SBI को इन चीजों में रखना होगा:

  • सरकारी बॉन्ड (सबसे ज्यादा यहीं)
  • सोना
  • approved securities

फर्क यह है: इस पर बैंक को ब्याज मिलता है! सरकारी बॉन्ड पर 6-7% return मिल सकता है।


CRR और SLR में अंतर - एक साथ समझें

अब सबसे important part - दोनों में क्या फर्क है?

Comparison Table

पहलू

CRR

SLR

Full Form

Cash Reserve Ratio

Statutory Liquidity Ratio

क्या रखना होता है

Cash (नकद)

Liquid assets (bonds, gold)

कहां रखना होता है

RBI के पास

बैंक के पास ही

ब्याज मिलता है

नहीं

हां (bonds पर)

वर्तमान दर

~4-4.5%

~18%

Purpose

तरलता नियंत्रण

बैंक की सुरक्षा

बदला जा सकता है

हां (RBI बदलता है)

हां (RBI बदलता है)

Real-Life में समझें

सोचिए SBI के पास ₹10,000 करोड़ हैं:

Step 1: CRR काटो

  • 4% यानी ₹400 करोड़ → RBI को दे दिया (cash में)
  • बचे: ₹9,600 करोड़

Step 2: SLR काटो

  • 18% of ₹10,000 = ₹1,800 करोड़ → सरकारी bonds खरीदे
  • ये ₹1,800 करोड़ बैंक के पास हैं लेकिन bonds में locked

Step 3: अब लोन दे सकते हैं

  • ₹10,000 - ₹400 (CRR) - ₹1,800 (SLR) = ₹7,800 करोड़
  • इससे आम लोगों को लोन दे सकते हैं

याद रखने की ट्रिक

CRR: Cash RBI के पास Rakhna hai SLR: Securities Liquid में Rakhna hai (अपने पास)


CRR क्यों जरूरी है - 5 बड़े कारण

1. बैंक रन से बचाव

    1930s में अमेरिका में बैंक run हुआ था। लोगों को लगा कि बैंक डूब जाएगा, सब दौड़कर पैसे निकालने लगे। बैंक के पास cash नहीं था, वो सच में डूब गया।

CRR इसी से बचाता है। अगर अचानक सब लोग पैसे मांगने लगें तो बैंक के पास कुछ cash तो होगा ही।

उदाहरण: 2008 में global financial crisis के समय बहुत से विदेशी बैंक डूब गए। लेकिन भारत में CRR/SLR की वजह से बैंक बच गए।

2. पैसे की आपूर्ति नियंत्रित करना

    अगर महंगाई बढ़ रही है तो RBI क्या करेगा? CRR बढ़ा देगा!

2022-23 का Example:

  • महंगाई 7% तक पहुंच गई
  • RBI ने सोचा: बाजार में बहुत पैसा घूम रहा है
  • CRR थोड़ा बढ़ाया (मान लो 4% से 4.5%)
  • अब बैंकों के पास कम पैसा लोन देने के लिए
  • लोगों को कम लोन मिलेगा
  • खर्च कम होगा
  • महंगाई control में आएगी

3. बैंकिंग सिस्टम की स्थिरता

    सब बैंकों को एक minimum cash रखना पड़ता है। इससे कोई बैंक बहुत ज्यादा risky loans नहीं दे सकता।

काल्पनिक उदाहरण:

अगर CRR नहीं होता:

  • XYZ Bank ने ₹100 करोड़ जमा लिए
  • पूरे ₹100 करोड़ लोन में दे दिए
  • अचानक ₹20 करोड़ वाला कर्जदार भाग गया
  • अब vault खाली है
  • लोग पैसे मांग रहे हैं
  • Bank डूब गया!

CRR होने से:

  • ₹100 करोड़ में से ₹4 करोड़ RBI में safe
  • ₹18 करोड़ bonds में safe
  • सिर्फ ₹78 करोड़ लोन में
  • कुछ bad loans हो भी जाएं तो संभल जाएगा

4. Repo Rate को effective बनाना

    जब RBI रेपो रेट बदलता है तो उसका असर तभी होता है जब बैंकों को RBI से पैसे लेने पड़ें। CRR की वजह से बैंकों के पास limited cash होता है, इसलिए उन्हें RBI पर निर्भर रहना पड़ता है।

5. Financial Discipline

    यह बैंकों को disciplined रखता है। वे जानते हैं कि एक हिस्सा तो reserve में रखना ही है, इसलिए बहुत ज्यादा aggressive lending नहीं करते।


SLR क्यों जरूरी है - इसके अपने फायदे

A. सरकार को funding

    सरकार को पैसों की जरूरत होती है - सड़क बनाने, सेना के लिए, योजनाओं के लिए। वो बॉन्ड जारी करती है।

SLR की वजह से बैंकों को ये बॉन्ड खरीदने पड़ते हैं। इससे सरकार को guaranteed buyers मिल जाते हैं।

उदाहरण:

  • 2020 में कोरोना आया
  • सरकार को लाखों करोड़ चाहिए थे
  • Special bonds जारी किए
  • बैंकों ने SLR के तहत खरीदे
  • सरकार को पैसा मिल गया

B. बैंक को return मिलता है

    CRR पर कुछ नहीं मिलता लेकिन SLR में रखे bonds पर 6-7% ब्याज मिलता है। यह बैंक के लिए एक safe investment है।

C. Liquidity बनाए रखना

    Bonds को जरूरत पड़ने पर बेचा जा सकता है। अगर बैंक को अचानक cash चाहिए तो bonds बेचकर पैसा ला सकता है।

D. Risk Management

    सरकारी बॉन्ड सबसे safe investment हैं। इससे बैंक की कुछ रकम एकदम safe जगह होती है।


कैसे काम करता है - पूरा Process

चलिए एक छोटे बैंक "ABC Bank" का example लेते हैं और पूरा process देखते हैं।

Day 1: ग्राहक पैसे जमा करते हैं

सोमवार को ABC Bank में:

  • राज ने जमा किए: ₹50,000
  • सीता ने जमा किए: ₹1,00,000
  • 100 और लोगों ने जमा किए
  • कुल जमा: ₹1 करोड़

Day 2: CRR Calculate करो

मंगलवार को Bank Manager:

  • CRR = 4%
  • ₹1 करोड़ का 4% = ₹4 लाख
  • यह ₹4 लाख RBI account में transfer करना होगा
  • बचे: ₹96 लाख

Day 3: SLR Calculate करो

बुधवार को:

  • SLR = 18%
  • ₹1 करोड़ का 18% = ₹18 लाख
  • Treasury department सरकारी bonds खरीदता है ₹18 लाख के
  • अब बचे: ₹96 लाख - ₹18 लाख = ₹78 लाख

Day 4: लोन देना शुरू करो

गुरुवार से:

  • अब इन ₹78 लाख से लोन दे सकते हैं
  • किसी को home loan, किसी को car loan
  • 9-10% ब्याज पर देंगे
  • यहीं से बैंक का मुनाफा होगा

Monthly Process

हर महीने:

  • नए deposits आएंगे
  • CRR/SLR recalculate होगा
  • RBI को report करनी होगी
  • अगर कम रखा तो penalty

RBI कैसे इस्तेमाल करता है - Monetary Policy में भूमिका

Scenario 1: महंगाई बढ़ रही है

Problem: CPI 7% हो गई, लोग परेशान हैं

RBI का Action:

  • CRR बढ़ाओ 4% से 4.5%
  • अब बैंकों के पास कम पैसा
  • कम लोन देंगे
  • बाजार में पैसे की आपूर्ति घटेगी
  • महंगाई control होगी

Real Example: 2013-14 में यही हुआ था। महंगाई 11% थी, RBI ने CRR/SLR दोनों बढ़ाए।

Scenario 2: Economy सुस्त है

Problem: कंपनियां बंद हो रही हैं, बेरोजगारी बढ़ रही है

RBI का Action:

  • CRR घटाओ 4.5% से 4%
  • बैंकों के पास ज्यादा पैसा
  • सस्ते लोन देंगे
  • लोग खर्च करेंगे
  • Economy में रफ्तार आएगी

Real Example: 2020 में lockdown के बाद RBI ने CRR घटाया ताकि बैंक ज्यादा लोन दे सकें।

Scenario 3: Banking Crisis

Problem: कोई बड़ा बैंक डूबने वाला है

RBI का Action:

  • CRR/SLR में थोड़ी छूट दे सकता है
  • उस बैंक को तुरंत liquidity मिल जाएगी
  • Crisis टल जाएगा

Real Example: 2019 में YES Bank संकट में था। RBI ने special provisions दिए।


आम आदमी पर असर - आपकी जिंदगी से कैसे जुड़ा है

(i) आपके लोन की ब्याज दर पर

जब CRR बढ़ता है:

  • बैंक के पास कम पैसा → लोन महंगे
  • आपकी होम लोन EMI बढ़ सकती है
  • नए लोन मिलना मुश्किल

जब CRR घटता है:

  • बैंक के पास ज्यादा पैसा → लोन सस्ते
  • यह home/car खरीदने का अच्छा समय

(ii) FD के ब्याज पर

CRR बढ़ा:

  • बैंकों को पैसों की जरूरत → FD rates बढ़ाएंगे
  • आपको ज्यादा ब्याज मिलेगा

CRR घटा:

  • बैंकों के पास पैसा है → FD rates घटा सकते हैं

(iii) बचत खाते पर

Indirectly, आपके savings account पर भी असर पड़ता है। CRR/SLR जितना ज्यादा, बैंक के लिए उतना मुश्किल profitable रहना। वो fees बढ़ा सकते हैं या minimum balance की मांग कर सकते हैं।


Historical Changes - पिछले 20 साल की यात्रा

2000-2008: Stable Period

CRR: 5-9% के बीच SLR: 25% के आसपास (काफी ज्यादा था)

2008: Global Crisis

RBI ने CRR घटाया 9% से 5% तक ताकि बैंकों के पास liquidity रहे।

2013-14: High Inflation

CRR फिर बढ़ाया गया। महंगाई control करनी थी।

2020: COVID Crisis

CRR को historic low 3% तक लाया गया। Economy को support चाहिए था।

2020 onwards: Gradual Normalization

धीरे-धीरे CRR को फिर 4-4.5% के सामान्य स्तर पर लाया गया।

SLR भी 25% से घटकर 18% आ गया है पिछले 15 सालों में।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. CRR और SLR का फुल फॉर्म क्या है?

👉 CRR = Cash Reserve Ratio (नकद आरक्षित अनुपात) SLR = Statutory Liquidity Ratio (वैधानिक तरलता अनुपात)

2. CRR और SLR में मुख्य अंतर क्या है?

👉 CRR में cash RBI के पास रखना होता है और कोई ब्याज नहीं मिलता। SLR में liquid assets (bonds, gold) अपने पास रखने होते हैं और ब्याज मिलता है।

3. वर्तमान CRR और SLR कितना है?

👉 CRR लगभग 4-4.5% और SLR लगभग 18% के आसपास है। यह RBI समय-समय पर monetary policy के अनुसार बदलता है।

4. CRR पर ब्याज क्यों नहीं मिलता?

👉 CRR एक regulatory requirement है जो बैंकों की liquidity सुनिश्चित करने के लिए है। यह बैंक का investment नहीं है इसलिए ब्याज नहीं मिलता।

5. SLR में कौन से assets रखे जा सकते हैं?

👉 सरकारी बॉन्ड और प्रतिभूतियां, approved securities, और सोना। मुख्य रूप से सरकारी bonds में ही रखा जाता है।

6. अगर बैंक CRR/SLR maintain नहीं करे तो क्या होगा?

👉 RBI भारी जुर्माना लगाएगा। यदि बैंक द्वारा बार-बार और गंभीर स्तर पर CRR/SLR का पालन नहीं किया जाता है, तो RBI उसके विरुद्ध नियामकीय कार्रवाई कर सकता है। बैंक की rating भी गिर सकती है।

7. CRR और Repo Rate में क्या संबंध है?

👉 दोनों RBI के monetary policy tools हैं। CRR long-term liquidity management के लिए है जबकि Repo Rate short-term के लिए। दोनों साथ में काम करते हैं महंगाई नियंत्रित करने के लिए।

8. क्या CRR/SLR सभी बैंकों के लिए एक जैसा है?

👉 हां, सभी scheduled commercial banks के लिए CRR और SLR की दर समान होती है। कोई छूट नहीं मिलती।


        इस तरह CRR और SLR भारतीय बैंकिंग प्रणाली की रीढ़ हैं। ये सिर्फ technical terms नहीं हैं - ये तय करते हैं कि आपको कितने ब्याज पर लोन मिलेगा, आपकी FD पर कितना return आएगा, और देश की अर्थव्यवस्था कितनी stable रहेगी। अब जब आप सुनें कि "RBI ने CRR बढ़ाया" तो आप समझ सकेंगे कि यह आपकी जेब को कैसे प्रभावित करेगा।

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