विदेश में पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन कैसे लें? पूरी जानकारी।

 विदेश में पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन कैसे लें? पूरी जानकारी।

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जब रिया का ऑक्सफोर्ड का सपना टूटने लगा

    शाम के साढ़े छह बज रहे थे। रिया अपने कमरे में बैठी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एडमिशन लेटर को बार-बार पढ़ रही थी। तीन साल की मेहनत, IELTS की तैयारी, SOP लिखने में लगे महीने - सब रंग लाया था। लेकिन अब एक नई समस्या सामने थी जिसके बारे में उसने कभी गंभीरता से नहीं सोचा था।

उसके पिता, जो एक सरकारी स्कूल में टीचर हैं, धीरे से कमरे में आए और बोले, "बेटा, मैंने सारी FD तोड़ दी है। घर का सोना भी बेचने की सोच रहा हूं। फिर भी बीस लाख की कमी है। तुम्हारी दो साल की पढ़ाई का पूरा खर्च पचास लाख बैठ रहा है।"

रिया की आंखों में आंसू आ गए। क्या सच में उसका सपना अधूरा रह जाएगा? उसी रात उसकी बड़ी बहन ने एजुकेशन लोन के बारे में बताया। अगले दो महीने में सब कुछ बदल गया। आज रिया ऑक्सफोर्ड में पढ़ रही है, और उसके पिताजी को न तो घर बेचना पड़ा, न सोना।

आइये समझते हैं कि एजुकेशन लोन क्या है, विदेश में पढ़ाई के लिए कैसे मिलता है, कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स चाहिए, और सबसे महत्वपूर्ण - कैसे इसे आसानी से चुकाया जा सकता है।

एजुकेशन लोन क्यों जरूरी है विदेश की पढ़ाई के लिए?

    विदेश में पढ़ाई का खर्च भारत की तुलना में कई गुना ज्यादा होता है। अमेरिका में मास्टर्स करनी है तो 40-60 लाख, UK में 35-50 लाख, कनाडा में 30-45 लाख, ऑस्ट्रेलिया में 35-50 लाख। इसमें सिर्फ ट्यूशन फीस नहीं, बल्कि रहने का खर्च, खाने-पीने का खर्च, किताबें, यात्रा - सब शामिल है।

बहुत कम परिवार हैं जो इतनी बड़ी रकम एकमुश्त दे सकें। और अगर दे भी दें तो पूरी जीवन भर की बचत खत्म हो जाती है। यहीं पर एजुकेशन लोन काम आता है। ये सिर्फ पैसों का इंतजाम नहीं, बल्कि एक स्मार्ट फाइनेंशियल डिसीजन है।

सबसे बड़ा फायदा - आप पढ़ाई खत्म होने के बाद ही चुकाना शुरू करते हैं। पढ़ाई के दौरान सिर्फ ब्याज देना होता है (वो भी optional कई मामलों में)। और जब नौकरी लग जाती है तब EMI शुरू होती है। प्लस, एजुकेशन लोन के ब्याज पर टैक्स में भी छूट मिलती है (धारा 80E)।

एजुकेशन लोन कितने प्रकार के होते हैं?

सिक्योर्ड लोन (सुरक्षित ऋण)

इसमें आपको कोई संपत्ति गिरवी रखनी होती है - घर की रजिस्ट्री, जमीन के कागज, FD, LIC पॉलिसी, शेयर्स वगैरह। कोलैटरल होने की वजह से बैंक को भरोसा ज्यादा होता है, इसलिए ब्याज दर कम होती है (9-10% के आसपास) और बड़ी रकम आसानी से मिल जाती है।

7.5 लाख से ज्यादा के लोन में आमतौर पर कोलैटरल मांगा जाता है। अगर आप टॉप यूनिवर्सिटी में जा रहे हैं तो कुछ बैंक बिना कोलैटरल के भी बड़ा लोन दे देते हैं।

अनसिक्योर्ड लोन (असुरक्षित ऋण)

इसमें कुछ गिरवी नहीं रखना होता। सिर्फ को-एप्लिकेंट (आमतौर पर माता-पिता) की गारंटी चाहिए होती है। लेकिन ब्याज दर ज्यादा होती है (11-14%) और रकम भी सीमित (10-15 लाख तक)। आपकी प्रोफाइल बहुत अच्छी हो - अच्छे मार्क्स, टॉप यूनिवर्सिटी, अच्छी जॉब प्रॉस्पेक्ट - तो ही मिलता है।

गवर्नमेंट स्कीम्स

सरकार की कुछ योजनाएं हैं जो कम ब्याज दर पर लोन देती हैं:

पद्मा योजना (स्किल डेवलपमेंट के लिए): यहां सरकार 3.5% सब्सिडी देती है। मतलब अगर बैंक 10% पर लोन दे रहा है तो आपको असल में 6.5% ही देना होगा।

सेंट्रल सेक्टर इंटरेस्ट सब्सिडी स्कीम: गरीब परिवारों के मेधावी छात्रों के लिए। परिवार की सालाना आय 4.5 लाख से कम हो और आपने 12वीं में 80% से ज्यादा मार्क्स लाए हों।

कौन-कौन सी चीजें कवर होती हैं एजुकेशन लोन में?

बहुत से लोग सोचते हैं कि एजुकेशन लोन सिर्फ ट्यूशन फीस के लिए होता है। लेकिन असलियत में काफी कुछ कवर होता है:

ट्यूशन फीस: पूरे कोर्स की फीस

एग्जामिनेशन फीस: सेमेस्टर और फाइनल एग्जाम की फीस

लाइब्रेरी और लैब फीस: जो भी यूनिवर्सिटी चार्ज करे

किताबें और उपकरण: लैपटॉप, कैमरा (अगर कोर्स के लिए जरूरी हो), पढ़ाई के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर

रहने का खर्च: हॉस्टल फीस या किराया, खाना, बिजली-पानी

ट्रैवल खर्च: भारत से विदेश जाने-आने का हवाई टिकट, वीजा फीस

बीमा: मेडिकल इंश्योरेंस और ट्रैवल इंश्योरेंस

प्रोजेक्ट वर्क: अगर कोर्स में कोई प्रोजेक्ट या स्टडी टूर शामिल हो

दो-पहिया वाहन: कुछ बैंक विदेश में रहने के लिए बाइक खरीदने का खर्च भी देते हैं

कुछ बैंक मार्जिन मनी भी देते हैं जो यूनिवर्सिटी में जमा करनी होती है। हालांकि आजकल ज्यादातर बैंक चाहते हैं कि 10-15% खर्च आप खुद उठाएं (मार्जिन मनी के रूप में)।

एजुकेशन लोन के लिए कौन अप्लाई कर सकता है?

मुख्य शर्तें:

भारतीय नागरिक होना जरूरी है: NRI या विदेशी नागरिक नहीं ले सकते

उम्र: आमतौर पर 18 से 35 साल के बीच। कुछ बैंक PhD के लिए 40 साल तक की उम्र में भी देते हैं

एडमिशन कन्फर्म होना चाहिए: एडमिशन लेटर या ऑफर लेटर होना जरूरी है। सिर्फ अप्लाई किया है, ये काफी नहीं

मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी: जिस संस्थान में जा रहे हैं वो अपने देश में मान्यता प्राप्त होना चाहिए

को-एप्लिकेंट: माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी में से कोई एक को-ऐप्लिकेंट होना चाहिए जिसकी अच्छी इनकम हो

अच्छा एकेडमिक रिकॉर्ड: बहुत खराब मार्क्स हों तो दिक्कत हो सकती है। आमतौर पर ग्रेजुएशन में कम से कम 55-60% चाहिए

कौन सी यूनिवर्सिटीज और कोर्सेज के लिए मिलता है?

देश के हिसाब से:

ज्यादातर बैंक इन देशों में पढ़ाई के लिए आसानी से लोन देते हैं:

→ USA, UK, Canada, Australia (सबसे पॉपुलर)
→ Germany, France, Netherlands, Sweden (यूरोप)
→ Singapore, New Zealand, Ireland

कुछ नए डेस्टिनेशन भी आ रहे हैं जैसे Dubai, Malaysia लेकिन उनके लिए थोड़ी ज्यादा स्क्रूटनी होती है।

कोर्स के हिसाब से:

हाई डिमांड कोर्सेज: Engineering, MBA, Medicine, Data Science, Computer Science, Finance, Law - इनके लिए आसानी से मिलता है

मीडियम डिमांड: Psychology, Economics, Architecture, Design

लो डिमांड: Fine Arts, Philosophy, Ancient History - इनके लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती है क्योंकि बैंक जॉब प्रॉस्पेक्ट देखते हैं

PhD और रिसर्च प्रोग्राम के लिए भी मिलता है, बशर्ते अच्छी यूनिवर्सिटी हो। ऑनलाइन डिग्री या डिस्टेंस लर्निंग के लिए आमतौर पर नहीं मिलता।

कौन से बैंक देते हैं एजुकेशन लोन?

सरकारी बैंक:

SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया): सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद। Global Ed-Vantage स्कीम के तहत बिना कोलैटरल के 1.5 करोड़ तक। ब्याज दर 9.5-10.5% के बीच।

Bank of Baroda: Star Education Loan स्कीम। टॉप रैंकिंग यूनिवर्सिटी के लिए बिना कोलैटरल 1.5 करोड़ तक।

Canara Bank: Vidya Turant स्कीम। प्रोसेसिंग तेज होती है।

Punjab National Bank: PNB Saraswati योजना। महिलाओं के लिए 0.5% कम ब्याज।

प्राइवेट बैंक:

HDFC Credila: सिर्फ एजुकेशन लोन में स्पेशलाइज करते हैं। प्रोसेसिंग बहुत तेज। थोड़ा महंगा लेकिन सर्विस अच्छी।

Axis Bank: डिजिटल प्रोसेस। ऑनलाइन अप्लाई करो, जल्दी अप्रूवल।

ICICI Bank: टॉप यूनिवर्सिटीज के लिए बिना कोलैटरल भी देते हैं।

NBFCs (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी):

Avanse, InCred, Auxilo: ये स्पेशलाइज्ड एजुकेशन लोन कंपनियां हैं। प्रोसेस फ्लेक्सिबल है, कम डॉक्यूमेंटेशन। लेकिन ब्याज थोड़ा ज्यादा (12-14%)।

कौन से डॉक्यूमेंट्स चाहिए?

एजुकेशन लोन की सबसे बड़ी टेंशन होती है - कागजों का ढेर। लेकिन अगर सही तरीके से ऑर्गनाइज करें तो आसान हो जाता है।

स्टूडेंट के डॉक्यूमेंट्स:

पहचान प्रमाण: आधार कार्ड, पासपोर्ट, PAN कार्ड

पता प्रमाण: बिजली का बिल, राशन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट

एकेडमिक रिकॉर्ड: 10वीं से लेकर ग्रेजुएशन तक की सभी मार्कशीट्स और सर्टिफिकेट्स

एडमिशन प्रूफ: यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर या एडमिशन कन्फर्मेशन

फीस स्ट्रक्चर: यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट से डाउनलोड किया हुआ या यूनिवर्सिटी से मिला हुआ

एंट्रेंस एग्जाम स्कोर: GRE, GMAT, IELTS, TOEFL जो भी दिया हो

रिज्यूमे/CV: अपनी क्वालिफिकेशन, इंटर्नशिप, एक्सट्रा करिकुलर

SOP (Statement of Purpose): क्यों ये कोर्स, क्यों ये यूनिवर्सिटी, भविष्य की प्लान क्या

को-एप्लिकेंट के डॉक्यूमेंट्स:

पहचान और पता प्रमाण: आधार, PAN, पासपोर्ट

इनकम प्रूफ:

  • सैलरीड हैं तो पिछले 6 महीने की सैलरी स्लिप और Form 16
  • बिजनेस है तो पिछले 2-3 साल का ITR और बैंक स्टेटमेंट

एंप्लॉयमेंट प्रूफ: जॉब लेटर, ऑफिस का ID कार्ड

बैंक स्टेटमेंट: पिछले 6-12 महीने का

कोलैटरल डॉक्यूमेंट्स (अगर सिक्योर्ड लोन हो):

प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स: रजिस्ट्री, सेल डीड, म्युनिसिपल टैक्स रसीद

प्रॉपर्टी वैल्यूएशन: रजिस्टर्ड वैल्यूएर से करवाना होता है

FD/LIC: अगर ये गिरवी रख रहे हैं तो उनके पेपर्स

स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस - कैसे अप्लाई करें?

चरण 1: रिसर्च और प्लानिंग (6-8 महीने पहले)

सबसे पहले तय करें कि कौन सा देश, कौन सी यूनिवर्सिटी, कितना खर्च आएगा। फिर कई बैंकों से संपर्क करें और उनकी शर्तें, ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस कंपेयर करें। ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर से हिसाब लगाएं कि भविष्य में कितनी EMI देनी होगी।

चरण 2: यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर (4-6 महीने पहले)

पहले यूनिवर्सिटी में एडमिशन कन्फर्म करें। Conditional offer letter मिल जाए तो लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं, लेकिन फाइनल डिस्बर्समेंट Unconditional offer के बाद ही होगा।

चरण 3: लोन अप्लीकेशन सबमिट करें (3-4 महीने पहले)

बैंक की ब्रांच में जाएं या ऑनलाइन अप्लाई करें। सभी डॉक्यूमेंट्स साथ रखें। एप्लीकेशन फॉर्म बहुत ध्यान से भरें - एक भी गलती से रिजेक्शन हो सकता है।

चरण 4: बैंक की स्क्रूटनी और वेरिफिकेशन (2-3 हफ्ते)

बैंक आपके सभी डॉक्यूमेंट्स वेरिफाई करेगा। को-एप्लिकेंट की इनकम चेक होगी, क्रेडिट स्कोर देखा जाएगा। अगर कोलैटरल है तो प्रॉपर्टी का वैल्यूएशन होगा। कभी-कभी बैंक घर पर या ऑफिस में विजिट भी करता है।

चरण 5: लोन अप्रूवल (1-2 हफ्ते)

सब कुछ सही रहा तो बैंक "सैंक्शन लेटर" देगा जिसमें लिखा होगा - कितना लोन अप्रूव हुआ, कितने ब्याज पर, क्या-क्या शर्तें हैं। इसे बहुत ध्यान से पढ़ें। अगर कुछ समझ न आए तो बैंक से पूछें।

चरण 6: लोन एग्रीमेंट साइन करें

सैंक्शन लेटर से सहमत हैं तो एग्रीमेंट पर साइन करें। अगर कोलैटरल है तो उसकी रजिस्ट्री बैंक के नाम होगी। सभी को-एप्लिकेंट्स को भी साइन करना होगा।

चरण 7: लोन डिस्बर्समेंट (विभिन्न चरणों में)

बैंक सारा पैसा एक साथ नहीं देता। पहले ट्यूशन फीस का पहला इंस्टॉलमेंट सीधे यूनिवर्सिटी के अकाउंट में ट्रांसफर होगा। फिर लिविंग एक्सपेंसेज आपके अकाउंट में आएंगे (या विदेश में आपके नए खोले अकाउंट में)। हर बार रसीद और प्रूफ मांगा जाएगा।

ब्याज दर और रीपेमेंट की पूरी जानकारी

ब्याज दर कैसे तय होती है?

ब्याज दर कई चीजों पर निर्भर करती है:

बेस रेट + मार्जिन: बैंक की बेस रेट होती है (मान लो 8%) और उसके ऊपर मार्जिन जुड़ता है (1-3%)। तो कुल ब्याज 9-11% हो गई

को-एप्लिकेंट की इनकम: अगर को-एप्लिकेंट की मजबूत इनकम है तो कम ब्याज मिल सकती है

कोलैटरल: सिक्योर्ड लोन में ब्याज कम होती है

यूनिवर्सिटी की रैंकिंग: टॉप 100 यूनिवर्सिटी में जा रहे हैं तो बैंक कम ब्याज देते हैं

स्टूडेंट का प्रोफाइल: अच्छे मार्क्स, अच्छा कोर्स, अच्छा जॉब प्रॉस्पेक्ट

महिला छात्रों के लिए: कुछ बैंक 0.5% कम ब्याज देते हैं

मोरटोरियम पीरियड

ये सबसे बड़ा फायदा है एजुकेशन लोन का। मोरटोरियम मतलब वो समय जब आपको EMI नहीं देनी होती। ये पीरियड होता है: कोर्स की अवधि + 6 महीने या नौकरी लगने तक, जो भी पहले हो

मान लीजिये आपका कोर्स 2 साल का है। तो 2 साल + 6 महीने = 30 महीने तक EMI नहीं देनी होगी। इस दौरान दो ऑप्शन हैं:

सिंपल इंटरेस्ट पे करें: हर महीने सिर्फ ब्याज का भुगतान करें। इससे लोन बढ़ता नहीं, और भविष्य में EMI भी कम रहेगी

कुछ न दें: मोरटोरियम पीरियड में कुछ न दें, लेकिन ब्याज जुड़ता रहेगा और लोन बढ़ता जाएगा

रीपेमेंट कैसे होता है?

मोरटोरियम खत्म हुआ तो EMI शुरू हो जाती है। आमतौर पर 10-15 साल की अवधि होती है। आप चाहें तो छोटी अवधि चुन सकते हैं (EMI ज्यादा होगी लेकिन कुल ब्याज कम) या लंबी अवधि (EMI कम, कुल ब्याज ज्यादा)।

जल्दी चुकाने पर कोई पेनाल्टी नहीं: अगर आपको अच्छी नौकरी लग गई और आप जल्दी चुकाना चाहें तो फ्री में प्री-पेमेंट कर सकते हैं

टैक्स बेनिफिट: जो ब्याज देते हैं उसपर धारा 80E के तहत पूरी छूट मिलती है - कोई लिमिट नहीं। अगर साल में 80,000 रुपये ब्याज दिया और आप 30% टैक्स ब्रैकेट में हैं, तो 24,000 रुपये बच गए

लोन अप्रूवल बढ़ाने के टिप्स

1) अच्छा एकेडमिक रिकॉर्ड बनाएं

ग्रेजुएशन में अच्छे मार्क्स लाएं। एंट्रेंस एग्जाम में भी अच्छा स्कोर। बैंक ये देखता है कि आपने पढ़ाई में कैसा परफॉर्म किया है।

2) टॉप रैंकिंग यूनिवर्सिटी चुनें

अगर आप टॉप 200 में आने वाली यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले सकें तो लोन मिलना बहुत आसान हो जाता है। बैंक को भरोसा होता है कि वहां से पढ़कर अच्छी नौकरी मिलेगी।

3) को-एप्लिकेंट की मजबूत फाइनेंशियल प्रोफाइल

को-एप्लिकेंट की अच्छी और स्थिर इनकम बहुत मायने रखती है। अगर पिताजी की इनकम कम है तो किसी और रिश्तेदार को को-एप्लिकेंट बनाएं जिसकी इनकम अच्छी हो।

4) अच्छा SOP और करियर प्लान

बैंक सिर्फ मार्कशीट नहीं देखता, ये भी देखता है कि आपकी भविष्य की प्लानिंग क्या है। एक अच्छा SOP लिखें जिसमें स्पष्ट हो कि इस कोर्स के बाद क्या करेंगे, कैसे लोन चुकाएंगे।

5) कोलैटरल की व्यवस्था

अगर बड़ी रकम चाहिए तो कोलैटरल रखने से बचें नहीं। इससे न सिर्फ लोन जल्दी मिलता है बल्कि ब्याज भी कम होती है।

6) कई बैंकों में अप्लाई करें

एक ही बैंक भरोसे मत बैठिये। कम से कम 3-4 बैंकों में अप्लाई करें। किसी एक ने रिजेक्ट किया तो दूसरा अप्रूव कर सकता है।

आम समस्याएं और उनके समाधान

समस्या 1: लोन रिजेक्ट हो गया

समाधान: पहले कारण जानें। अगर डॉक्यूमेंटेशन में कमी है तो पूरा करके दोबारा अप्लाई करें। अगर को-एप्लिकेंट की इनकम कम है तो दूसरा को-एप्लिकेंट जोड़ें। NBFC को भी ट्राई करें, वो थोड़े फ्लेक्सिबल होते हैं।

समस्या 2: कोलैटरल की व्यवस्था नहीं है

समाधान: टॉप यूनिवर्सिटी में एडमिशन हो तो बिना कोलैटरल के भी कुछ बैंक देते हैं। या फिर कम रकम के लिए अनसिक्योर्ड लोन लें। कुछ स्कॉलरशिप भी अप्लाई करें जिससे लोन की जरूरत कम हो।

समस्या 3: विदेश में रहने का खर्च कवर नहीं हो रहा

समाधान: कुछ बैंक सिर्फ ट्यूशन फीस देते हैं। ऐसे बैंक चुनें जो लिविंग एक्सपेंसेज भी कवर करें। या फिर ट्यूशन के लिए लोन लें और लिविंग के लिए पार्ट-टाइम जॉब करें (ज्यादातर देशों में 20 घंटे हफ्ते की अनुमति होती है)।

समस्या 4: डिस्बर्समेंट में देरी

समाधान: यूनिवर्सिटी से डेडलाइन का प्रेशर हो तो बैंक को स्पष्ट बताएं। अगर बैंक बहुत धीमा है तो NBFC में शिफ्ट करने का विकल्प देखें - वो तेज होते हैं।

स्कॉलरशिप और लोन का कॉम्बिनेशन

सिर्फ लोन पर निर्भर मत रहिये। स्कॉलरशिप के लिए भी कोशिश करें:

यूनिवर्सिटी स्कॉलरशिप: बहुत सी यूनिवर्सिटी मेरिट बेस्ड या नीड बेस्ड स्कॉलरशिप देती हैं

गवर्नमेंट स्कॉलरशिप: भारत सरकार की कई स्कीम्स हैं - Commonwealth Scholarship, Fulbright, DAAD

प्राइवेट स्कॉलरशिप: Tata, Inlaks, JN Tata Endowment जैसी कई स्कॉलरशिप

स्कॉलरशिप मिल गई तो लोन की जरूरत कम हो जाती है। या फिर आप स्कॉलरशिप की रकम लोन चुकाने में लगा सकते हैं।

विदेश में पार्ट-टाइम काम और लोन चुकाना

ज्यादातर देश स्टूडेंट वीजा पर पार्ट-टाइम काम की अनुमति देते हैं:

USA: 20 घंटे हफ्ते (कैंपस पर), छुट्टियों में फुल टाइम

UK: 20 घंटे हफ्ते, छुट्टियों में फुल टाइम

Canada: 20 घंटे हफ्ते + को-ऑप/इंटर्नशिप

Australia: हर दो हफ्ते में 48 घंटे

मान लीजिये आप UK में हैं और 20 घंटे हफ्ते काम करते हैं £12 प्रति घंटे पर। महीने में लगभग £960 (करीब ₹1 लाख) बन जाते हैं। इससे रहने का खर्च निकल जाता है और कुछ बचत भी हो सकती है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. एजुकेशन लोन लेने में कितना समय लगता है?

पूरी प्रोसेस में 3-6 हफ्ते लगते हैं। अगर सभी डॉक्यूमेंट्स सही हैं और वेरिफिकेशन में कोई दिक्कत नहीं तो 2-3 हफ्ते में भी हो सकता है। NBFC थोड़े तेज होते हैं, कभी-कभी 10-15 दिन में।

Q2. क्या बिना कोलैटरल के बड़ा लोन मिल सकता है?

हां, अगर आप टॉप रैंकिंग यूनिवर्सिटी में जा रहे हैं। SBI, Bank of Baroda, HDFC Credila बिना कोलैटरल के 1-1.5 करोड़ तक दे देते हैं। लेकिन आपका एकेडमिक रिकॉर्ड बहुत अच्छा होना चाहिए।

Q3. क्या पढ़ाई के दौरान EMI देनी होती है?

नहीं, मोरटोरियम पीरियड होता है जो कोर्स की अवधि + 6 महीने का है। इस दौरान EMI नहीं देनी होती। हालांकि अगर चाहें तो सिर्फ ब्याज दे सकते हैं जिससे भविष्य में बोझ कम होगा।

Q4. अगर विदेश में नौकरी मिल गई तो लोन कैसे चुकाएं?

विदेश से भी EMI भेज सकते हैं। बैंक आपको एक फॉरेन अकाउंट से ऑटो डेबिट की सुविधा देता है। या फिर हर महीने ट्रांसफर करें। कुछ बैंक आपके माता-पिता से EMI ले लेते हैं और आप उन्हें विदेश से पैसे भेजते रहें।

Q5. क्या एजुकेशन लोन पर टैक्स बेनिफिट मिलता है?

हां, धारा 80E के तहत जो ब्याज देते हैं उसपर पूरी छूट मिलती है, कोई लिमिट नहीं। ये बेनिफिट 8 साल तक मिलता है या लोन चुकाने तक, जो भी पहले हो। प्रिंसिपल अमाउंट पर कोई छूट नहीं।

Q6. क्या दो लोन एक साथ ले सकते हैं?

हां, अगर एक लोन से पूरा खर्च कवर नहीं हो रहा तो दूसरा लोन ले सकते हैं। कुछ लोग एक बैंक से ट्यूशन के लिए और दूसरे से लिविंग एक्सपेंसेज के लिए लेते हैं। लेकिन EMI का बोझ दोगुना होगा।


अंतिम सलाह

    रिया की कहानी से हमने शुरुआत की थी। आज वो ऑक्सफोर्ड से MBA कर चुकी है और लंदन में एक अच्छी कंपनी में काम कर रही है। उसकी पहली सैलरी से उसने लोन की EMI शुरू की और आज आधा से ज्यादा चुका चुकी है। उसके पिताजी को न तो घर बेचना पड़ा, न FD तोड़नी पड़ी।

एजुकेशन लोन कोई बोझ नहीं, बल्कि अपने सपनों में निवेश है। लेकिन ये भी सच है कि इसे समझदारी से लेना और चुकाना जरूरी है।

कुछ महत्वपूर्ण बातें याद रखें:

→ जल्दी प्लानिंग शुरू करें, कम से कम 6-8 महीने पहले
→ कई बैंकों से बात करें, शर्तों को कंपेयर करें
→ छोटे प्रिंट (terms and conditions) जरूर पढ़ें
→ जितना जरूरी है उतना ही लोन लें, ज्यादा नहीं
→ स्कॉलरशिप के लिए जरूर कोशिश करें
→ पढ़ाई के दौरान पार्ट-टाइम काम की प्लान बनाएं
→ अच्छी यूनिवर्सिटी और अच्छे कोर्स में एडमिशन लें जहां जॉब प्लेसमेंट अच्छा हो

और सबसे जरूरी - अपने माता-पिता के साथ खुलकर बात करें। उन्हें लगता है कि वो आपके सपनों के लिए सब कुछ बेच देंगे। लेकिन एजुकेशन लोन एक स्मार्ट और जिम्मेदार रास्ता है जिससे आप अपने सपने पूरे कर सकते हैं बिना परिवार पर अनावश्यक बोझ डाले।

आपके सपने, आपकी मेहनत, आपकी जिम्मेदारी। बस एक स्मार्ट फाइनेंशियल डिसीजन की जरूरत है!


⚠ अस्वीकरण (Disclaimer):  

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य के लिए तैयार किया गया है। एजुकेशन लोन की शर्तें, ब्याज दरें, मोरटोरियम अवधि, कोलैटरल नियम और पात्रता मानदंड बैंक या वित्तीय संस्था के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं तथा समय-समय पर बदल सकते हैं। लोन लेने से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक शर्तें और नियम ध्यानपूर्वक पढ़ें। लोन स्वीकृति बैंक की आंतरिक नीतियों, क्रेडिट मूल्यांकन और दस्तावेज़ सत्यापन पर निर्भर करती है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपनी पुनर्भुगतान क्षमता और जोखिम का मूल्यांकन करें या योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें। इस लेख में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे।

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